बरेली: महिलाओं की भागीदारी ने बना दिया आत्मनिर्भर
बरेली, अमृत विचार। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर सरकार का फोकस है। इसलिए गन्ने की पैदावार में अब महिलाओं की भूमिका अहम हो गई है। अब तक 25 महिला समूह से जुड़ी 260 महिलाएं गन्ने की पांच लाख से अधिक सीडलिंग की बिक्री कर साढ़े सात लाख से अधिक की आय कर …
बरेली, अमृत विचार। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर सरकार का फोकस है। इसलिए गन्ने की पैदावार में अब महिलाओं की भूमिका अहम हो गई है। अब तक 25 महिला समूह से जुड़ी 260 महिलाएं गन्ने की पांच लाख से अधिक सीडलिंग की बिक्री कर साढ़े सात लाख से अधिक की आय कर चुकी है।
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया महिला सशक्तिकरण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने को कोरोना काल में महिला किसानों को सिंगल बड एवं बड चिप विधि से गन्ने की पौध तैयार करने को प्रशिक्षण दिया गया था। महिला किसानों की मेहनत रंग लाई। अगस्त से मार्च तक 522491 बडचिप से पौधे तैयार किये गए जिसमें 509890 बडचिप को किसानों को वितरण कराया गया। बहेडी में सबसे अधिक कार्य जोरों पर रहा।
यहां गन्ना विकास परिषद के माध्यम से किसान पौध खरीद कर ले जा रहे हैं। कृषकों द्वारा प्रति पौध 1.50 रुपये हिसाब से 7,64745 रुपये इस महिला समूह को मिला और डेढ़ रुपये प्रति पौध गन्ना विकास परिषद द्वारा अनुदान 764745 रुपए दिया गया। ये धनराशि अगले वर्ष लगभग डेढ़ गुनी एवं उसके अगले वर्ष ढाई गुनी होने का अनुमान है। गन्ना अधिकारी के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
गन्ना विकास परिषदों में ग्रामीण महिलाओं को गन्ने की खेती में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने को कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा क्योंकि ग्रामीण महिलाओं में उद्यमिता की भावना विकसित हो रही है और इससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया समूह द्वारा तैयार नर्सरी में काफी कम गन्ना लगता है। जिससे कम बीज अधिक क्षेत्रफल में बोया जा रहा है।
