बरेली: बिलिंग एजेंसी की लापरवाही की भेंट चढ़ी प्रॉप बिलिंग

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अमृत विचार,बरेली। मैनुअल रीडिंग के बाद अब प्रॉप केबिल से बिजली बिल बनाने की व्यवस्था भी लापरवाही की भेंट चढ़ गई। जनपद में सिर्फ 10 फीसदी कनेक्शन के ही बिल प्रॉप बिलिंग से बने हैं। इसको लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत निगम मुख्यालय से जिले के अधिकारियों की फटकार लगाई गई है। जिसके बाद अब अधिकारी …

अमृत विचार,बरेली। मैनुअल रीडिंग के बाद अब प्रॉप केबिल से बिजली बिल बनाने की व्यवस्था भी लापरवाही की भेंट चढ़ गई। जनपद में सिर्फ 10 फीसदी कनेक्शन के ही बिल प्रॉप बिलिंग से बने हैं। इसको लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत निगम मुख्यालय से जिले के अधिकारियों की फटकार लगाई गई है। जिसके बाद अब अधिकारी शत-प्रतिशत बिलिंग प्रॉप केबिल से करवाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों ने बिलिंग एजेंसी को भी सभी 3.50 लाख कनेक्शन पर बिजली बिल प्रॉप केबिल से करने के निर्देश दिए हैं।

बिलिंग एजेंसी के मीटर रीडरों पर आये दिन फर्जी बिजली बिल बनाने के आरोप लगते रहते हैं। शिकायतें आती हैं कि उपभोक्ता के दरवाजे पर जाये बिना ही मनमाने तरीके से बिल बना दिये जाते हैं। इससे जहां ज्यादा बिल बनने पर उपभोक्ता के ऊपर भार बढ़ता है तो वहीं कम बिल बनने पर निगम को राजस्व हानि होती है। फर्जी बिलिंग रोकने के लिये देहात के चार वितरण खंडों में प्रॉप बिलिंग शुरू हुई है लेकिन मैनुअल मीटर रीडिंग की तरह यह व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो गई।

ग्रामीण क्षेत्र के अधिशासी अभियंता तारिक जलील ने बताया देहात के 3.50 लाभ उपभोक्ताओं में पहले महीने सिर्फ 37 हजार के बिजली बिल ही प्रॉप केबिल के जरिए बने हैं। इसको लेकर प्रबंध निदेशक की चेतावनी के बाद बिलिंग एजेंसी को निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया अब शत प्रतिशत बिल प्रॉप केबल के जरिए ही बनाए जाएंगे। बिलिंग एजेंसी की मानें तो देहात में अलग- अलग एजेंसियों के मीटर लगे होने की वजह से सभी मीटर प्रॉप केबिल को सपोर्ट नहीं करते। इसी वजह से बिलिंग का आंकड़ा कम है।

ऐसे होती है प्रॉप बिलिंग
प्रॉप बिलिंग के लिए कंपनी के सभी मीटर रीडर के मोबाइल फोन में डीवीवीएनएल एप डाउनलोड किया गया है। एप डाउनलोड होने के बाद मीटर रीडर अपने फोन को मीटर से कनेक्ट कर सकते हैं। एप से मीटर कनेक्ट होते ही उपभोक्ता की सभी जानकारी एप पर दिखने लगती है। रीडर मीटर का फोटो खींचकर एप पर सेव करता है। इसके बाद ही उपभोक्ता को बिल दिया जाता है। इस एप के जरिए उपभोक्ता को दिए जाने वाले बिल की पूरी जानकारी विभाग को मिल जाती है।

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