बरेली: बच्चे को हृदय, गुर्दा और सांस का रोग तो लगवाएं Influenza Vaccine

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। फ्लू और कोरोना का संक्रमण एक जैसा होता है। पांच साल से कम उम्र के शिशुओं को फ्लू से निमोनिया होने की आशंका ज्यादा होती है। अगर शिशु पहले से ही हृदय, गुर्दा, खून की बीमारी या कुपोषण से पीड़ित है तो उसमें यह वायरस बहुत घातक साबित हो जाता है। ऐसे …

बरेली, अमृत विचार। फ्लू और कोरोना का संक्रमण एक जैसा होता है। पांच साल से कम उम्र के शिशुओं को फ्लू से निमोनिया होने की आशंका ज्यादा होती है। अगर शिशु पहले से ही हृदय, गुर्दा, खून की बीमारी या कुपोषण से पीड़ित है तो उसमें यह वायरस बहुत घातक साबित हो जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को इनफ्लुएंजा वैक्सीन यानी कि फ्लू का टीका जरूर लगवाएं। यह चार तरह के वायरस से बच्चों को बचाता है, जिसमें स्वाइन फ्लू भी शामिल है।

इनफ्लुएंजा सांस का एक संक्रामक रोग है, जिसकी शुरुआत खांसी, जुकाम और हल्के बुखार से होती है। इनफ्लुएंजा वायरस हमारे शरीर में नाक, हाथ और मुंह से प्रवेश कर सकता है। इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आते ही संक्रमण फैल सकता है। इनफ्लुएंजा वैक्सीन छह महीने से लेकर पांच साल तक के बच्चों को लगाते हैं। दो डोज के बीच एक महीने का अंतराल रखते हैं।

नौ साल से अधिक उम्र वाले बच्चों या अन्य सभी में एक ही डोज लगाई जाती है जो व्यक्ति गंभीर हृदय, गुर्दे, श्वांस संबंधी रोगों से पीड़ित होते हैं। उन्हें हर साल फ्लू की वैक्सीन लगवानी चाहिए। बच्चों में श्वांस संबंधी रोगों से होने वाली हर साल मौतों में छह से सात प्रतिशत गंभीर इनफ्लुएंजा संक्रमण से होती हैं। ऐसे में डॉक्टर इसका टीका लगवाने की सलाह दे रहे हैं।

दो प्रकार की होती वैक्सीन
इनफ्लुएंजा वैक्सीन दो प्रकार की हैं इनफ्लुएंजा ए और बी। इनफ्लुएंजा वैक्सीन की कीमत लगभग डेढ़ हजार से 2000 के बीच है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते डब्ल्यूएचओ ने शिशुओं को अनिवार्य रूप से फ्लू का टीका लगवाने की सलाह दी है। हालांकि, यह टीका कोरोना से नहीं बचाता है।

ये हैं लक्षण

  • थकान महसूस होती और शरीर अस्वस्थ रहता।
  • कमजोरी से कुछ काम करने पर चक्कर आने लगते।
  • तेज बुखार के साथ ठंड भी लगने लगती है।
  • गले में कफ होने से खाने, पीने, निगलने में तकलीफ होती है।
  • सांस की परेशानी भी हो सकती है।

ऐसे करें बचाव

  • खूब पानी पीएं।
  • साफ-सफाई रखें।
  • बासा खाना न खाएं।
  • फलों का जूस भी पीएं।
  • प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाला भोजन न करें।
  • सांस लेने में तकलीफ होने पर डॉक्टर को दिखाएं।

छह महीने के शिशु से बड़े बच्चों को लगाया जाता
जिला महिला अस्पताल सीएमएस डा. अलका शर्मा ने बताया कि फ्लू अथवा इनफ्लुएंजा टीका छह महीने के शिशु से बड़े बच्चों को लगाया जाता है। पहली बार टीका लगवाने पर एक महीने के अंतर से दोबारा टीका लगाया जाता है। इसके बाद हर साल एक-एक बार। फ्लू वायरस बहुत ज्यादा बदलता है। इसलिए दो बार टीका लगाना पड़ता है। यह टीका स्वाइन फ्लू समेत चार प्रकार के वायरस से बच्चों को बचाता है।

बुजुर्ग को इनफ्लुएंजा वैक्सीन लगवा सकते हैं
जिला अस्पताल वरिष्ठ फिजिशियन डा. बागीश वैश्य ने बताया कि छह महीने के बच्चे से 70 साल के बुजुर्ग को इनफ्लुएंजा वैक्सीन लगवा सकते हैं क्योंकि कोरोना और फ्लू के लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। ऐसे में दोनों बीमारियों में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। अगर फ्लू का टीका लगा होगा तो ये तय हो जाएगा कि मरीज को ये बीमारी नहीं है। बच्चों में वैक्सीन लगाने के दो माह बाद फ्लू से खतरा काफी कम हो जाता है।

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