मुरादाबाद: बालश्रम को ले जाए जा रहे सात बच्चों को कराया मुक्त, तीन लोगों के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट
मुरादाबा अमृत विचार। कर्मभूमि एक्सप्रेस ट्रेन में मानव तस्करी की सूचना मिलने पर रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में ट्रेन के मुरादाबाद पहुंचने पर आरपीएफ-जीआरपी सहित चाइल्ड लाइन की टीम ने सभी मजदूरों को उतार लिया। इसके बाद सभी से पूछताछ की गई, जिसमें पता चला कि वे मजदूरी के लिए बिहार से …
मुरादाबा अमृत विचार। कर्मभूमि एक्सप्रेस ट्रेन में मानव तस्करी की सूचना मिलने पर रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में ट्रेन के मुरादाबाद पहुंचने पर आरपीएफ-जीआरपी सहित चाइल्ड लाइन की टीम ने सभी मजदूरों को उतार लिया। इसके बाद सभी से पूछताछ की गई, जिसमें पता चला कि वे मजदूरी के लिए बिहार से अमृतसर जा रहे थे। सात नाबालिग बच्चों को बिना परिजनों की अनुमति के ले जाने वाले तीन ठेकेदारों के खिलाफ बालश्रम अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। अन्य नाबालिगों को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द करने के साथ ही 44 मजदूरों को उनके घर वापस भेज दिया गया है।
गुरुवार की सुबह कंट्रोल रूम जीआरपी मुरादाबाद, चाइल्ड लाइन व आरपीएफ को सूचना प्राप्त हुई कि न्यू जलपाई गुडी (पं0 बंगाल) से अमृतसर (पंजाब) जा रही ट्रेन संख्या 04207 कर्मभूमि एक्सप्रेस में कुछ नाबालिगों को बिहार, पश्चिमी बंगाल व उत्तर प्रदेश से तस्करी कर काम कराने के लिए पंजाब ले जाया जा रहा है। उन्हें अलग-अलग कोचों में बैठाया गया है।
इस पर पुलिस अधीक्षक रेलवे अपर्णा गुप्ता के दिशा निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक देवी दयाल के पर्यवेक्षण में टीम गठित की गई। इसमें प्रभारी निरीक्षक जीआरपी सुधीर कुमार, प्रभारी निरीक्षक थाना जीआरपी रामपुर सिद्धार्थ तोमर, थानाध्यक्ष थाना जीआरपी चंदौसी सतीश कुमार सहित आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार राणा, चाइल्ड लाइन कोऑर्डिनेटर एमए फारूखी शामिल थे।
टीम ने प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर ट्रेन के पहुंचते ही बताए गए कोच में तलाशी शुरू की। तीन अलग-अलग कोच में 82 मजूदरों को प्लेटफार्म पर उतारा गया। इसके बाद सभी से पूछताछ की गई तो पता चला कि वे मजदूरी करने अमृतसर व पंजाब जा रहे हैं। जीआरपी प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार ने बताया कि 82 मजदूरों में 38 नाबलिग व 44 बालिग निकले। फिलहाल नाबालिगों को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया, जबकि बालिगों को घर वापस भेज दिया गया है।
सात नाबालिगों के संबंधी होने का नही दे पाए प्रमाण
प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार ने बताया कि जब एक- एक कर बच्चों से पूछताछ की गई तो सात नाबालिग बच्चों को साथ ले जाने वाले तीन व्यक्ति सगे सम्बन्धी होने का प्रमाण नहीं दे पाए। इस पर चाईल्ड लाईन रेलवे मुरादाबाद के को-ऑर्डिनेटर एमए फारूखी द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर तीन ठेकेदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि शाहनूर आलम पुत्र अनवर खां, निवासी ग्राम छोटा बटियार, थाना रायगंज, जनपद उत्तरी दीनाजपुर (पं बगाल), दुलाल शर्मा पुत्र फोंश शर्मा, निवासी दहनिया, थाना आजमनगर, जिला कटिहार (बिहार) व ब्रजेश शर्मा पुत्र राम केवल शर्मा निवासी मं. नं. 1521, सेक्टर 52, थाना सेक्टर 61, चंडीगढ के विरुद्ध थाना जीआरपी मुरादाबाद पर धारा 370, 374 व बाल श्रम अधिनियम 1986 व धारा 75 व 79 किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 व बाल श्रम अधिनियम 1933 की धारा 06 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
213 बच्चों की मिली थी सूचना
एसपी रेल अपर्णा गुप्ता को ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जरिए 213 बच्चों को बिहार से पंजाब ले जाने की सूचना मिली थी। उनमें से कुछ बच्चों को सीतापुर रेलवे स्टेशन पर उतार लिया गया, जबकि 82 मजदूरों को महानगर में जंक्शन पर उतारा गया। बच्चों को उतारने के बाद उनके परिजन भी ट्रेन से उतर गए।
एसपी रेलवे अपर्णा गुप्ता ने बताया कि ट्रेन में मानव तस्करी की सूचना मिलने के बाद टीम को सतर्क किया गया था। ट्रेन से कुल 82 मजदूर बरामद किए गए थे, जिनमें 38 नाबालिग थे। सात बच्चों को ले जाने वाले तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है, क्योंकि वे बच्चों के संबंधी होने का प्रमाण नही दे पाए। उनसे पूछताछ की जा रही है। मानव तस्करी जैसा कोई मामला नहीं मिला।
साहब पेट का सवाल है, मजदूरी नहीं करेंगे तो भूखे मर जाएंगे
साहब पेट का सवाल है, इसलिए मजदूरी करने जा रहे हैं। मजदूरी नहीं करेंगे तो भूखे मर जाएंगे। लाकडाउन में जैसे-तैसे सूखी रोटी खाकर दिन गुजारे हैं। अब काम के लिए अमृतसर जा रहे थे। कोरोना से तो बच गए। लेकिन अब काम नहीं किया तो आगे का जीवन कैसे व्यतीत कर पाएंगे। यह दर्द था गुरुवार को कर्मभूमि एक्सप्रेस ट्रेन से पकड़े गए बच्चों का।
कोरोना के प्रकोप के कारण लाखों लोगों ने अपनी जान गंवा दी। लाखों ने कोरोना से जंग जीती। लेकिन, लॉकडाउन के कारण मध्यम वर्ग का काम धंधा बंद होने से खाने तक के लाले पड़ गए। रोजाना मजदूरी कर आजीविका चलाने वाले मजदूरों के सामने भविष्य तो दूर वर्तमान में जीने के लिए भी संकट खड़ा हो गया। कोरोना के मामले कम हुए तो धीरे-धीरे अनलाक की प्रक्रिया शुरू हो गई। ऐसे में मजदूरों में आस जगी कि अब वे रोज कमाएंगे और पेट भरेंगे। ऐसे ही काम की तलाश में गुरुवार को कर्मभूमि एक्सप्रेस ट्रेन से 82 मजदूर, जिसमें नाबालिग, बालिग सभी शामिल थे। वह अमृतसर जा रहे थे। लेकिन, तस्करी की सूचना पर जीआरपी, आरपीएफ ने उन्हें स्टेशन पर उतार लिया।
