रक्षा साैदों में विवाद

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Edited By Amrit Vichar
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राफेल सौदे में फ्रांस की जांच ने देश में फिर से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस लड़ाकू विमान सौदे में कथित ‘भ्रष्टाचार और लाभ पहुंचाने’ के मामले में फ्रांस के एक न्यायाधीश को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिसके बाद रविवार को कांग्रेस और भाजपा के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया। फ्रांसीसी वेबसाइट ‘मीडिया …

राफेल सौदे में फ्रांस की जांच ने देश में फिर से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस लड़ाकू विमान सौदे में कथित ‘भ्रष्टाचार और लाभ पहुंचाने’ के मामले में फ्रांस के एक न्यायाधीश को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिसके बाद रविवार को कांग्रेस और भाजपा के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया। फ्रांसीसी वेबसाइट ‘मीडिया पार्ट’ के अनुसार, भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच हुए इस सौदे को लेकर जांच गत 14 जून को औपचारिक रूप से आरंभ हुई।

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई प्रमुख हस्तियों से भी सवाल पूछे जा सकते हैं। भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार ने इस विमान सौदे पर 23 सितंबर, 2016 को हस्ताक्षर किए थे। कांग्रेस का आरोप है कि इस सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है और 526 करोड़ रुपये के एक विमान की कीमत 1670 करोड़ रुपये अदा की गई। भाजपा और सरकार की तरफ से आरोपों को कई मौकों पर खारिज किया गया और यह कहा गया कि उच्चतम न्यायालय इस मामले में क्लीन चिट दे चुका है।

अब फिर से कांग्रेस ने राफेल विमानों की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सौदे में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग की है और कहा है कि सच का पता लगाने के लिए जांच का केवल यही रास्ता है। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जांच का आदेश देना चाहिए। जबकि भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि राहुल गांधी जिस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं, उससे लगता है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियां उन्हें मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। वह इस मसले पर शुरू से झूठ बोल रहे हैं। संभवत: वह एक एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं।

हालांकि इस सौदे पर उच्चतम न्यायालय वर्ष 2018 के अपने फैसले में सरकार और विपक्ष दोनों के लिए एक जरूरी संदेश दे चुका है कि रक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उपयुक्त राजनीतिक पहल के जरिए कोई ऐसी राह निकालना जरूरी है, जिससे रक्षा सौदों पर बार-बार खड़े होते विवादों से देश को मुक्ति मिले। वक्त आ गया है कि विपक्ष अपने राजनीतिक हितों से ऊपर उठ कर इस दिशा में समुचित प्रयास करे। सोचना होगा कि देश की ताकत बढ़ाने के लिए बोफ़ोर्स से लेकर राफेल तक होने वाले रक्षा सौदे विवाद में क्यों आ जाते हैं। देश में राजनीतिक विवादों को सुरक्षा से ज्यादा तरजीह नहीं दी जानी चाहिए।