बरेली: निस्वार्थ भाव से दो मासूमों का हो रहा रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपचार
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में जहां एक ओर हर इंसान पैसा कमाने की दौड़ में लगा है। बावजूद निजी चिकित्सा जगत में कहीं न कहीं इंसानियत अभी जिंदा है। इसका उदाहरण तब सामने आया जब बीते दिनों शाही में लावरिस हाल में मिली बच्ची को शहर के रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज में मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में जहां एक ओर हर इंसान पैसा कमाने की दौड़ में लगा है। बावजूद निजी चिकित्सा जगत में कहीं न कहीं इंसानियत अभी जिंदा है। इसका उदाहरण तब सामने आया जब बीते दिनों शाही में लावरिस हाल में मिली बच्ची को शहर के रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज में मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। डॉक्टर दो नवजातों को मौत के मुंह से खींचने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
बीते दिनों शाही थाना क्षेत्र के दुनका चौकी के सुल्तानपुर में चंद घंटे पहले जन्मी नवजात को अंधेरे में सुनसान स्थान पर गन्ने के खेत में फेंक दिया गया था। रातभर खेत में कीड़ों ने नवजात के दोनों पैरों की एड़ियों को जख्मी कर दिया था। मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विशेषज्ञ डा. अलका ने बताया कि बच्ची के जख्म इतने गहरे हो गए कि हड्डी तक दिखने लगी। जख्मी हालत में खेत में बच्ची देखकर वर्तमान में एनआईसीयू में बच्ची का निशुल्क उपचार किया जा रहा है।
29 जून को पीलीभीत में एक दिन की नवजात बच्ची को गंभीर हालत में जिला अस्पताल से रेफर किया गया। उस बच्ची की हालत भी बेहद गंभीर थी। चिकित्सकों ने बताया कि दोनों ही नवजातों को एनआईसीयू में भर्ती कर निशुल्क उपचार किया जा रहा है।
