बरेली: महापुरुष का अपमान- प्रतिमा के पास शौचालय अधिकारियों के लिए बना सिरदर्द
बरेली, अमृत विचार। जिला अस्पताल के पार्क में महापुरुष महाराणा प्रताप की प्रतिमा के पास ही सार्वजनिक शौचालय बनवाना अब स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया है। अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा कि इस समस्या से कैसे पार पाया जाए, क्योंकि स्वच्छ भारत मिशन में सावर्जनिक शौचालय …
बरेली, अमृत विचार। जिला अस्पताल के पार्क में महापुरुष महाराणा प्रताप की प्रतिमा के पास ही सार्वजनिक शौचालय बनवाना अब स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया है। अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा कि इस समस्या से कैसे पार पाया जाए, क्योंकि स्वच्छ भारत मिशन में सावर्जनिक शौचालय का काफी निर्माण पूरा हो चुका है।
इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मेयर डॉ. उमेश गौतम ने मध्यस्थता करने की बात कही है। उनका कहना है कि महापुरुष की प्रतिमा के पास शौचालय का निर्माण कराया जाना उचित नहीं है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से वार्ता करने के बाद कोई उचित रास्ता निकाला जाएगा।
बता दें कि जिला अस्पताल के पार्क में महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाने के लिए शासन ने क्षत्रिय महासभा को जमीन आवंटित की थी। अब प्रतिमा के पास शौचालय निर्माण को लेकर महासभा विरोध कर रही है। क्षत्रिय महासभा ने आपत्ति जताई है कि महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापित करने के लिए जो जगह निर्धारित की गई है, उसके पास ही सुलभ शौचालय का निर्माण शुरू कराकर महापुरुष का अपमान किया जा रहा है।
पहले जिला अस्पताल के मुख्य द्वार के पास पार्क में बने एक हिस्से में महाराणा प्रताप की मूर्ति लगवाने के लिए क्षत्रिय महासभा के साथ कई संगठनों ने मामले को शासन तक उठाया था। शासन स्तर पर इसकी अनुमति मिलने के बाद पिछली 7 जुलाई में अनुमति मिलने के बाद राज्य ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह पुंडीर के हाथों मूर्ति स्थापित करने के लिए शिलान्यास भी हो चुका है। इस बीच नगर निगम ने पार्क से सटकर महाराणा प्रताप की मूर्ति के पास ही सामुदायिक शौचालय का निर्माण अभी कुछ दिन पहले ही शुरू करा दिया है।
इस मामले में लापरवाही सामने आई है कि जिला अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने सड़क के दूसरी ओर पहले एक सुलभ शौचालय बना था लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कुछ समय पहले यहां वैक्सीनेशन सेंटर बना लिया। दीवार खड़ी हो जाने के बाद इस शौचालय का इस्तेमाल आमजन के लिए बंद हो गया। अब इस मामले के तूल पकड़ने से यह प्रकरण स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। इसलिए अब बीच का रास्ता तलाशने के लिए मेयर डॉ. उमेश गौतम मध्यस्ता करेंगे।
शौचालय बनवाने के लिए खर्च हो रही 6.5 लाख की रकम
नगर निगम के अफसरों के सामने दिक्कत यह है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए 6.5 लाख रुपये के काम होने हैं। इसके लिए काफी रकम खर्च कर शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है। जबकि पास में ही महाराणा की प्रतिमा भी स्थापित की जानी है।
पहले से बना था शौचालय तो विरोध क्यों हो रहा : सीएमओ
सीएमओ एसके गर्ग का कहना है कि पार्क में जिस जगह पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाई जा रही है, उसके पास पहले से ही शौचालय का निर्माण चल रहा था लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा था। उस समय प्रतिमा लगाने के लिए शायद किसी ने ध्यान नहीं दिया था। फिर भी कोशिश की जा रही है कि इस मामले का कोई हल निकल आए।
पर्यावरण अभियंता, नगर निगम संजीव प्रधान ने बताया कि इस मामले को लेकर मैंने जेई को मौके पर भेजा था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से वार्ता चल रही है। कोशिश की जा रही है कि इस मामले का जल्द हल निकल आए।
