सीबीआई पहुंची प्रयागराज, पूर्व बसपा विधायक की बढ़ी मुश्किलें

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Edited By Amrit Vichar
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    लखनऊ। पांच साल पहले हुए चर्चित सर्राफा कारोबारी हत्याकांड के मामले में बसपा की पूर्व विधायक पूजा पाल व अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मार्च माह में पूर्व विधायक सहित सातों आरोपियों से पूछताछ के बाद बुधवार को सीबीआई टीम प्रयागराज पहुंची और घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएट किया। …

 

 

लखनऊ। पांच साल पहले हुए चर्चित सर्राफा कारोबारी हत्याकांड के मामले में बसपा की पूर्व विधायक पूजा पाल व अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मार्च माह में पूर्व विधायक सहित सातों आरोपियों से पूछताछ के बाद बुधवार को सीबीआई टीम प्रयागराज पहुंची और घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएट किया। सीबीआई इस मामले में सिविल लाइंस थाने से एफआईआर के कागजात, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विवेचना के दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है।

प्रयागराज के सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र स्थित बिशप जॉनसन स्कूल के पीछे वाली गली में बुधवार को सीबीआई टीम पहुंची। यह वही जगह थी, जहां पांच साल पहले सर्राफा कारोबारी ललित वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई की फॉरेंसिक टीम ने इस घटना के चश्मदीद और सिविल लाइंस पुलिस की ओर से आरोपी बनाए गए ललित वर्मा के चचेरे भाई विक्रम वर्मा के बयान के आधार पर क्राइम सीन रीक्रिएट किया।

सीबीआई टीम के दो सदस्य ललित और विक्रम वर्मा के रूप में बाइक पर बैठकर आगे बढ़े। पीछे से बाइक और कार से शूटर पहुंचे। ललित की बाइक को टक्कर मारने के बाद पीछे से आए शूटरों ने उन्हें गोली मारी। सीबीआई ने सीन दोहराने के दौरान इस बात का बारीकी से अध्ययन किया कि कैसे और कितनी दूरी से गोली चलाई गई थी। बाइक पर पीछे बैठे ललित वर्मा को गोली मारने वालों ने कहां से किस एंगल से फायरिंग की थी। साथ ही घटनास्थल के आसपास भागने के तरीके और आने और जाने के रास्ते का भी सीबीआई टीम ने गहनता से निरीक्षण किया।

इस घटना में पुलिस की ओर से आरोपी बनाए गए ललित वर्मा के साथ मौजूद उसके चचेरे भाई विक्रम वर्मा का कहना था कि कार और बाइक से पहुंचे हमलावरों ने पीछे से गोलियां चलाई थीं। इस फायरिंग में दोनों भाई घायल हो गए। जबकि इस मामले की विवेचना कर रही सिविल लाइंस पुलिस ने खुलासे के वक्त कहा था कि सीसीटीवी फुटेज में घटना के वक्त कार कहीं नहीं दिखी, सिर्फ बाइक सवार नजर आ रहे थे। इसी आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने विक्रम वर्मा को आरोपी बनाकर जेल भेजा था।

3 फरवरी 2016 में हुए इस हत्याकांड को लेकर ललित वर्मा के पिता विनोद वर्मा ने उस वक्त बताया था कि ललित और पूर्व विधायक पूजा पाल के बीच विवाद चल रहा था। यह विवाद धूमनगंज के साकेत नगर में एक मार्केट को लेकर था और इसी के चलते उनके बेटे की हत्या कराई गई है। उन्होंने पूर्व विधायक पूजा पाल और उनके सहयोगी राजेश त्रिपाठी, संदीप यादव, राहुल पाल, दिलीप पाल, मुकेश केशरवानी व पृथ्वीपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच के बाद सिविल लाइंस पुलिस ने इन्हें क्लीन चिट दे दी थी । साथ ही ललित वर्मा के साथ रहे उसके चचेरे भाई और घटना के दौरान घायल हुए विक्रम वर्मा को ही आरोपी बनाकर सिविल लाइंस पुलिस ने जेल भेज दिया था।

इस प्रकरण में जेल में बंद और पूजा पाल के पति पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड के प्रमुख आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद का भी नाम उछला था। पूजा पाल की ओर से कहा गया था कि अतीक अहमद के इशारे पर ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। बता दें कि राजू पाल हत्याकांड की जांच भी सीबीआई कर रही है।

सिविल लाइंस पुलिस की विवेचना से असंतुष्ट ललित का परिवार हाईकोर्ट पहुंचा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में वर्ष 2017 में इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 2019 में पूर्व विधायक पूजा पाल समेत 7 लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर जांच शुरू की। सीबीआई आरोपियों का बयान दर्ज कर चुकी है।

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