लखनऊ: लविवि में डेथ ऑफ संस्कृत शीर्षक पर छिड़ा विवाद, जानें क्या है मामला?
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा ऑनलाइन माध्यम से बीती 8 जुलाई को प्रस्तावित व्याख्यानमाला के शीर्षक में संस्कृत को मृत भाषा बताए जाने पर संस्कृत भारती अवध प्रांत ने विरोध दर्ज कराया और शुक्रवार को एक संबंध में एक ज्ञापन कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय सौंपा। व्याख्यान का विषय रीडिंग ट्रांसलेशंस टुडे इंडियन …
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा ऑनलाइन माध्यम से बीती 8 जुलाई को प्रस्तावित व्याख्यानमाला के शीर्षक में संस्कृत को मृत भाषा बताए जाने पर संस्कृत भारती अवध प्रांत ने विरोध दर्ज कराया और शुक्रवार को एक संबंध में एक ज्ञापन कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय सौंपा। व्याख्यान का विषय रीडिंग ट्रांसलेशंस टुडे इंडियन पर्सपेक्टिव्स द राइज ऑफ मॉडर्न वर्नाकुलर्स एंड डेथ ऑफ संस्कृत : रीडिंग ईश्वर चंद्र विद्यासागर रखा गया था।
इस व्याख्यान की वक्ता आंग्ल एवं सांस्कृतिक विभाग, वर्धमान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की विभागाध्यक्षा नन्दिनी भट्टाचार्या को बनाया गया था। कुछ विरोधाभास और संस्कृतज्ञों के प्रयास के कारण व्याख्यान स्थगित हो गया। ज्ञापन में कहा गया कि व्याख्यानमाला की आयोजिका प्रो. रानू उनियाल थी। जिनके द्वारा यह विषय चयनित किया गया। इससे यह प्रतीत होता है कि संस्कृत के प्रति उनके मन में दुर्भावनाएं है।
संस्कृत भारती यह मांग करती है कि भारत के संविधान और जनमानस की आस्था पर चोट पहुंचाने का दुःसाहस करने वाली आंग्लविभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. रानू उनियाल पर कठोरतम दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए उनका निलम्बन किया जाए। साथ ही सार्वजनिक रूप से इस विषय के चयन करने के लिए माफी मांगे और अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। ज्ञापन देने वालों में संस्कृत भारती अवध प्रांत के जे पी सिंह, शोभन लाल उकील, बृजेश बर्थवाल, हनुमंत सिंह, अनुज, रत्नेश शामिल रहें।
