बरेली: ‘अच्छे दिन आएंगे’ का महंगाई बजा रही ढोल
बरेली, अमृत विचार। भाजपा ने 2014 में कांग्रेस को महंगाई के मुद्दे पर जमकर घेरते हुए केंद्र में सरकार बनायी थी। नारा दिया था ‘अच्छे दिन आएंगे’ लेकिन 2014 से लेकर अब तक महंगाई की स्थिति पर नजर डालें तो महंगाई और बढ़ती चली गयी। कोरोना काल में कई महीनों तक कामधंधा बंद होने के …
बरेली, अमृत विचार। भाजपा ने 2014 में कांग्रेस को महंगाई के मुद्दे पर जमकर घेरते हुए केंद्र में सरकार बनायी थी। नारा दिया था ‘अच्छे दिन आएंगे’ लेकिन 2014 से लेकर अब तक महंगाई की स्थिति पर नजर डालें तो महंगाई और बढ़ती चली गयी। कोरोना काल में कई महीनों तक कामधंधा बंद होने के बाद सबसे ज्यादा किसान, गरीब लोगों को महंगाई से जूझना पड़ रहा है।
वर्ष 2014 से अब तक पेट्रोल पर करीब 20 रुपए, डीजल पर 40 रुपए और गैस सिलेंडर पर 300 रुपए तक वृद्धि हुई है। वर्तमान में सादा पेट्रोल 97.35 रुपए लीटर बिक रहा है। डीजल भी 90 रुपये लीटर पहुंच गया। सात सालों की स्थिति देखी जाए तो भाजपा सरकार भी महंगाई को काबू में करने में विफल रही है। यही वजह है कि आम आदमी के लिए दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं।
मिशन 2022 में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। विपक्ष भी केंद्र और राज्य सरकारों को महंगाई के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में लगा है। विपक्षी दलों से जुड़े नेताओं का कहना कि केंद्र में आने से पहले प्रधानमंत्री ने खूब बड़ी-बड़ी बातें कीं। जनता से वादा किया मोदी सरकार में अच्छे दिन आएंगे और महंगाई पर लगाम लगेगी। जनता को सीधा फायदा होगा लेकिन वह सिर्फ छलावा मात्र था। रोज कुछ न कुछ बढ़ोतरी हो रही है। उधर, डीजल की बढ़ती कीमतों से किसान परेशान हैं। कटाई का खर्च बढ़ चुका है। फसल का मूल्य लागत के अनुपात से काफी कम मिल रहा है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट
पेट्रोल-डीजल की यह कीमतें तब हैं, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में 2014 की तुलना में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर रोजमर्रा में शामिल वस्तुओं के अलावा ट्रांसपोर्ट समेत अन्य चीजों पर भी हो रहा है। डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण मालभाड़े में बढ़ोतरी हुई है। इस कारण आवश्यक चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं। दाल, सब्जी, अनाज, रेडीमेड खाद्य पदार्थों की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
गैस सिलेंडर की कुछ इस तरह बढ़ी कीमतें
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने गैस सिलेंडर की कीमतों में रिकॉर्ड कमी करने में सफलता पाई थी, लेकिन एक बार फिर इसमें बढ़ोतरी हो रही है। मनमोहन सिंह के कार्यकाल (फरवरी 2014) में 14.2 किलोग्राम वजन वाले सब्सिडी वाले एक सिलेंडर की कीमत 1134 रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन मई 2014 तक इसमें कमी आनी शुरू हो गई और मई 2014 में यह 928.50 रुपये पर आ गई थी। पिछले वर्ष एक मई 2019 को सब्सिडी वाला गैस सिलिंडर 712.50 रुपये में मिल रहा था, आज सब्सिडी खत्म हो गयी। इससे प्रति सिलेंडर 819 रुपये उपभोक्ता से वसूल किए जा रहे हैं।
महंगाई पर सियासत
जनता जब सरकार चुनने को वोट देती है तो लोकतंत्र को अच्छा लगता है। जब सरकार रिकॉर्ड सीट से सत्ता हासिल करती है, समर्थकों और पार्टियों को अच्छा लगता है लेकिन जब महंगाई रिकार्ड तोड़ने लगे तो किसी को अच्छा नहीं लगता। इसलिए महंगाई पर नियंत्रण जरूरी है। मनोहर सिंह, व्यापारी
सरकार किसी भी पार्टी की बनें लेकिन किसानों का हित कोई नहीं देखता। सरकारी कर्मियों की हर साल सैलरी बढ़ती है। उनको बोनस मिलता है, लेकिन दिन रात मेहनत करने वाले अन्नदाता पर तरस नहीं आता। डीजल, कीटनाशक, खाद पर लगातार महंगाई बढ़ने के बाद भी सरकार पुराने ढर्रे पर चल रही है। गजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू
डीजल की कीमतें रोजाना नया रिकार्ड बना रही हैं। केंद्र में मोदी सरकार को सात साल हो चुके हैं। इस दौरान डीजल के दामों में करीब 20 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इस वजह से परिवहन में नुकसान झेलना पड़ रहा है। माल-भाड़े में बढ़ोतरी आगे भी तय है। शोभित सक्सेना, अध्यक्ष, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
दोनों ही सरकारें सभी मोर्चों पर फेल साबित हो रही है। पेट्रोल सौ रुपये पहुंच गया है। रसोई गैस की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। पीएम के बहकावे में आकर अच्छे दिन आने की उम्मीद में जनता ने भाजपा को वोट दिया था, लेकिन चौतरफा महंगाई ने आज जानमानस की कमर तोड़कर रख दी है। अगम मौर्य, जिलाध्यक्ष सपा
केंद्र और प्रदेश सरकार ने संवेदनशीलता की सभी हदें पार कर दी हैं। पढ़े लिखे नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं। रिकार्ड तोड़ महंगाई ने उद्योग धंधों पर ताला लगा दिया। किसानों के साथ भी धोखा किया जा रहा है। जनता भी पूरी तरह भाजपा की जनविरोधी नीतियों को बारीकि से समझ चुकी है। निश्चित ही अगले चुनाव में भाजपा को जनता सबक सिखाएगी। डा. जयपाल सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने पर भी पेट्रोल डीजल के नाम पर जनता जुट रही है। केंद्र में सरकार बनने से पहले प्रधानमंत्री ने नारा दिया था, ‘बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार भाजपा की सरकार’; लेकिन अब यह नारा बदल चुका है। जनता का कहना है बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार कांग्रेस सरकार। अशफाक सकलैनी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
