हल्द्वानी: मानसून के नजरिए से उत्तराखंड देश के कमजोर इलाकों में शामिल

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नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। जलवायु परिवर्तन का असर उत्तराखंड पर पड़ रहा है। इसका नतीजा यह है कि यहां पर पिछले कुछ सालों में मानसून की सामान्य से हुई है। हिमालयी पर्यावरण वैज्ञानिकों ने इसको लेकर चिंता जताई है और कहा है कि इसका हिमालय के पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा। इस साल मानसून सही …

नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। जलवायु परिवर्तन का असर उत्तराखंड पर पड़ रहा है। इसका नतीजा यह है कि यहां पर पिछले कुछ सालों में मानसून की सामान्य से हुई है। हिमालयी पर्यावरण वैज्ञानिकों ने इसको लेकर चिंता जताई है और कहा है कि इसका हिमालय के पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा।

इस साल मानसून सही समय पर आने के बाद भी पिछले दो सप्ताह से कमजोर पड़ गया है। ऐसा इसी साल नहीं हुआ है इससे पहले के कुछ सालों में भी उत्तराखंड में मानसून कमजोर रहा है। यही नहीं यहां मानसून की बारिश में अनियमितता भी बहुत हो रही है। जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान के पर्यावरण विशेषज्ञ डा. जेसी कुनियाल ने बताया कि स्थानीय स्तर पर बात करें तो वनाग्नि की घटनाएं भी मानसून को कमजोर करने में सहायक हो रहीं हैं।

वनाग्नि की गर्म हवा मानसून की वाष्प को सुखा देती है। पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ीं हैं। कहा कि इसके अलावा वैश्विक स्तर पर देखें तो जलवायु परिवर्तन की मार उत्तराखंड पर भी पड़ी है। इसलिए यहां पर बारिश में कमी आ रही है। इधर राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह का कहना है कि पिछले कुछ सालों में उत्तर भारत के इस इलाके में कम मानसून की बारिश दर्ज हुई है। हालांकि बाकी के देश में ऐसा नहीं है।

हिमालय पर पड़ेगा बुरा असर
हल्द्वानी। डा. कुनियाल का कहना है कि कम बारिश हिमालय के पर्यावरण के लिए खतरा है। कम बारिश होगी तो तापमान बढ़ेगा और ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे। साथ ही हिमालय की नदियों में जलस्तर रहेगा और स्थानीय जलस्रोतों पर विपरीत असर पड़ेगा। इससे जंगल और हरियाली कम होंगे। इसके बाद पूरा पारिस्थितिकी तंत्र ही बिगड़ जाएगा। यही नहीं बुग्यालों की हरियाली भी प्रभावित होगी। बारिश की वजह से पर्यावरण में पूरा संतुलन बना रहता है। और हिमालयी पर्यावरण के संतुलन के बारिश जरूरी है।

पिछले छह सालों में उत्तराखंड में हुई मानसून की बारिश
साल           मिमी
2015        881.6
2016       1102.7
2017       1199.0
2018       1194.3
2019       960.4
2020       943.1

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