बरेली: जिले में ई-पाठशाला में 10 फीसदी छात्र, कैसे होगा पूरा लक्ष्य

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बरेली, अमृत विचार। जिले में परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को ई-पाठशाला से पढ़ाने के लिए शासन ने मिशन प्रेरणा अभियान शुरू किया था। जिले में 2485 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जिसमें 3.50 लाख छात्र-छात्राएं स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जिले में अब तक सिर्फ 41314 छात्र-छात्राओं को ही ई-पाठशाला से जोड़ा जा सका …

बरेली, अमृत विचार। जिले में परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को ई-पाठशाला से पढ़ाने के लिए शासन ने मिशन प्रेरणा अभियान शुरू किया था। जिले में 2485 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जिसमें 3.50 लाख छात्र-छात्राएं स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जिले में अब तक सिर्फ 41314 छात्र-छात्राओं को ही ई-पाठशाला से जोड़ा जा सका है। ऐसे में ई-पाठशाला के लक्ष्य पूरा होने पर संशय जताया जा रहा है।

शासन द्वारा ई-पाठशाला के लिए एआरपी ई मॉनिटिरिंग के माध्यम से शिक्षकों को प्रेरित किया जा रहा है और शिक्षकों से बात की जा रही है। एसआरजी और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों साथ जिला स्तर पर मीटिंग भी की जा रही है, जिसमें अभिभावकों को मोहल्ला पाठशाला के लिए जागरूक किया जा सके।

इसके लिए जिला स्तर पर तीन एसआरजी और ब्लॉक स्तर पर 5 एआरपी बनाए गए हैं। शिक्षकों के स्मार्टफोन पर व्हाट्सएप ग्रुप पर पाठ्य सामग्री को भेजा जाता है, जिसे शिक्षक को छात्र-छात्राओं के स्मार्टफोन पर भेजना पड़ता है। जिले में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बहुत कम छात्र-छात्राओं के पास ही स्मार्टफोन रहता है। इससे वह ई-पाठशाला की पाठ्य सामग्री देख पाते हैं।

प्रेरणा साथियों ने जिले के 41314 छात्रों को जोड़ा
जिले में सिर्फ 9200 छात्र-छात्राएं व्हाट्सएप पर मैसेज देखते हैं। इसमें 1153 छात्र-छात्राएं ही व्हाट्सएप पर सक्रिय रहते हैं, जो पाठ्य सामग्री देख पाते हैं। छात्र-छात्राओं के पास स्मार्टफोन न होने से इस योजना को सफल बनाने के लिए शिक्षकों से प्रेरणा साथी बनाने के लिए कहा गया था। जिले में शिक्षकों ने 13145 प्रेरणा साथी बना लिए हैं।

प्रेरणा साथियों ने करीब 41314 छात्र- छात्राओं को जोड़ा है। लेकिन कुछ प्रेरणा साथी परीक्षा और ड्यूटी पर जाने के कारण बच्चों को पाठ्य सामग्री नहीं दिखा पा रहे हैं। कुछ ही प्रेरणा साथियों द्वारा ही छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री दिखाई जा रही है। इसके कारण ई-पाठशाला में सभी छात्र-छात्राओं को जोड़ना मुश्किल काम लग रहा है।

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