बरेली: युवाओं को नशे का आदी बना रहे दवा दुकानदार

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। शासन से पाबंदी के बावजूद मेडिकल स्टोरों पर धड़ल्ले से नशीली दवाओं की बिक्री की जा रही है। कोडीन कैप्सूल, अल्प्राजोलम, डाइजीपाम, इस्पासमो, नाइट्राविट टेबलेट जैसी नशीली दवाएं बेहद आसानी से उपलब्ध हैं। जबकि इन दवाओं का इस्तेमाल केवल डॉक्टरी सलाह पर किया जा सकता है। मगर शहर की गलियों में ऐसे …

बरेली, अमृत विचार। शासन से पाबंदी के बावजूद मेडिकल स्टोरों पर धड़ल्ले से नशीली दवाओं की बिक्री की जा रही है। कोडीन कैप्सूल, अल्प्राजोलम, डाइजीपाम, इस्पासमो, नाइट्राविट टेबलेट जैसी नशीली दवाएं बेहद आसानी से उपलब्ध हैं। जबकि इन दवाओं का इस्तेमाल केवल डॉक्टरी सलाह पर किया जा सकता है।

मगर शहर की गलियों में ऐसे मेडिकल स्टोर मौजूद हैं जहां बिना किसी सवाल-जवाब के यह दवाएं मिल जाती हैं। शनिवार को अमृत विचार की टीम ने पड़ताल की तो कई मेडिकल स्टोर संचालक बिना डाक्टरी पर्चे के नशीली दवाएं देने को तैयार हो गए।

डाक्टर अवसाद और मानसिक रोगियों को यह दवाएं लिखते हैं मगर युवाओं में दिन-प्रतिदिन बढ़ती नशे की लत नशीली दवाओं की खूब बिक्री करा रही हैं। नशे के लिए युवा कोरेक्स और फेसिडिल सीरप का भी सेवन करते हैं। इनमें अधिकतर युवा 15 से 25 साल की उम्र के बीच होते हैं। अपनी कमाई के चक्कर में मेडिकल वाले भी बिना किसी पूछताछ के युवाओं को दवाएं बेच देते हैं।

मिनी बाइपास स्थित एक मेडिकल स्टोर पर हमारी टीम ने ग्राहक बनकर अल्प्राजोलम .5 मांगी तो मेडिकल संचालक बिना पूछताछ के 50 रुपए की 15 गोलियां देने को तैयार हो गया। जबकि, मिनी बाइपास स्थित ही एक अन्य मेडिकल संचालक ने बिना डॉक्टरी पर्चे के तीन गोलियां ही देने की बात कही।

डॉक्टर का पर्चा दिखाने पर पूरा पत्ता देने को कहा। वहीं, हार्टमन स्थित एक मेडिकल स्टोर पर भी मेडिकल संचालक बिना डॉक्टरी पर्चे के गोलियां देने के लिए तैयार हो गया। जाहिर है कि यह दवाएं आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

कार्रवाई के बावजूद नहीं खौफ
औषधि विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता है मगर कोई असर नहीं होता। बीते वित्तीय वर्ष में बरेली के अंदर औषधि विभाग ने ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 22 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निरस्त किए थे। जबकि 40 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निलंबित किये थे। मेडिकल स्टोर को नशीली दवाओं की बिक्री का पूरा लेखा-जोखा रखना होता है। ऐसा नहीं करने वाले दवा दुकानदारों का लाइसेंस रद या निलंबित किया जा सकता है।

यह हैं नशीली दवाओं के नुकसान
विशेषज्ञ बताते हैं कि नशीली दवाओं के सेवन से रोगी को बहुत ही गंभीर किस्म का डीहाइड्रेशन, पेट का अल्सर और कैंसर हो सकता है। इसके सेवन से किडनी की बीमारी या मानसिक अवसाद भी होता है। नशीली दवाएं रोगी के निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर डालती हैं। जरूरत से ज्यादा डोज लेने पर हार्ट अटैक की आशंका होती है।

बोले जिम्मेदारान

बिना डॉक्टर की पर्चे के यह दवाएं कतई नहीं दी जा सकती। इनका सेवन करना बेहद घातक हो सकता है जो लोग चोरी-छिपे इसकी कालाबाजारी करते हैं या युवाओं को बिना किसी डॉक्टरी सलाह के यह दवाएं देते हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। -दुर्गेश खटवानी, अध्यक्ष महानगर केमिस्ट एसोसियेशन

बीते दिनों अनियमितता बरतने वाले मेडिकल संचालकों पर कार्रवाई की थी। समय-समय अभियान चलाकर धरपकड़ की जाती है जिसमें कई दवा कारोबारियों के लाइसेंस भी निरस्त और निलंबित किए जाते हैं। -विवेक कुमार, औषधि निरीक्षक

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