मुरादाबाद : जिला अस्पताल में ‘प्राइवेट’ उपचार, मरीजों को लिखी जा रही बाहर की दवाएं

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवा को खुद चिकित्सक ही पलीता लगा रहे हैं। जिला अस्पताल में भी दवाओं की उपलब्धता के दावे को यहां के चिकित्सक ठेंगा दिखा रहे हैं। ओपीडी में आने वाले हर दूसरे मरीज को ब्रांडेड दवा लिखी जा रही हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में मुफ्त और सस्ते …

मुरादाबाद, अमृत विचार। सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवा को खुद चिकित्सक ही पलीता लगा रहे हैं। जिला अस्पताल में भी दवाओं की उपलब्धता के दावे को यहां के चिकित्सक ठेंगा दिखा रहे हैं। ओपीडी में आने वाले हर दूसरे मरीज को ब्रांडेड दवा लिखी जा रही हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में मुफ्त और सस्ते उपचार देने की सरकार की मंशा पूरी नहीं हो रही है।

मंगलवार को अमृत विचार की पड़ताल में कुछ इस तरह के ही दृश्य सामने आए। अस्पताल के ऑर्थो सर्जरी विभाग के प्लास्टर कक्ष में चिकित्सक अधिकांश मरीजों को कुछ दवाएं अस्पताल के काउंटर से और बाकी मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए पर्ची थमा रहे थे। पर्ची संख्या 21000831031373383 के मरीज को डॉक्टर ने डिजिटल एक्सरे की सलाह दी। दवा के नाम पर दो पर्ची थमा दीं। बोले कि यदि इसमें से एक अंदर से मिल जाए तो ठीक नहीं तो दोनों पर्चियों की दवाएं बाहर से खरीद लेना।

यह ही स्थिति सर्जरी व बाल रोग विभाग में भी देखने को मिली। इन विभागों में आने वाले मरीजों को भी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए पर्चे दिए जा रहे थे। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अस्पताल में दवाओं का भरपूर स्टॉक है। औषधि वितरण काउंटर के कुछ कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई डॉक्टर मरीजों को इसलिए मेडिकल स्टोर्स से दवा खरीदने को भेजते हैं क्योंकि इसमें उनका हित जुड़ा होता है।

जिला चिकित्सालय प्रमुख अधीक्षक डॉ. शिव सिंह ने बताया कि वैसे तो अस्पताल में दवाओं का भरपूर स्टॉक है। यदि कुछ दवाएं नहीं हैं तो जांच कराई जाएगी। जहां तक मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के परामर्श का सवाल है तो यदि कोई मरीज शिकायत करेगा तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जो दवा अस्पताल में उपलब्ध है, उसे बाहर से खरीद के लिए न लिखें। यदि मरीज खुद ऐसी इच्छा व्यक्त करे तो अलग बात है।

जिला अस्पताल में नियम दरकिनार, हाकिम लाचार

मुरादाबाद, एक तरफ तो प्रदेश में योगी सरकार अपनी हनक का ढोल पीट रही है तो दूसरी तरफ मुरादाबाद के जिला अस्पताल में सरकारी सिस्टम निजी एंबुलेंस संचालकों के आगे नतमस्तक है। अस्पताल के आला हाकिम प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों को परिसर से बाहर करने में खुद को लाचार बता रहे हैं। उनकी लाचारी कानून व्यवस्था की हनक की खुद पोल खोल रही है।

सरकारी अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेस को खड़ा करने का कोई नियम नहीं है। यदि निजी एंबुलेंस से मरीज लाए जाते हैं तो वह मरीजों को उतारने के बाद अपने गंतव्य को निकल जाते हैं। मगर मुरादाबाद के पंडित दीन दयाल उपाध्याय जिला पुरुष अस्पताल में तो अजब दादागिरी है। निजी एंबुलेंस संचालक नियमों को ताक पर रखकर सीना ताने अस्पताल परिसर में इमरजेंसी चिकित्सा भवन के सामने दिन रात खड़े रहते हैं।

अस्पताल के आला हाकिम खुद भी मानते हैं कि अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस नहीं खड़ी होनी चाहिए, लेकिन वह इन एंबुलेंस संचालकों को परिसर के बाहर करने में खुद को लाचार बता रहे हैं। हालांकि यह पूछने पर कि आखिर लाचारी किस वजह से है तो पहले तो चुप्पी साध लेते हैं। बाद में कहते हैं कि इससे मरीजों का भी भला हो जाता है।

कई बार सरकारी एंबुलेंस न मिलने से मरीज की जान पर संकट आने की स्थिति भी बन जाती है। सूत्रों की माने तो इन निजी एंबुलेंस संचालकों की सेटिंग अस्पताल के कर्मियों से ही है। खुद इमरजेंसी में आकर निजी एंबुलेंस के संचालक रेफर किए गए मरीजों को लेकर निजी अस्पतालों या अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों में लेकर जाते हैं। इसके बदले वह बेबस लोगों से मनमाना किराया भी वसूलते हैं।

प्रमुख अधीक्षक डॉ. शिव सिंह ने कहा कि यह सही है कि अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस नहीं खड़ी होनी चाहिए, लेकिन परिस्थितियों को भी देखना पड़ता है। कई बार मना किया लेकिन इनके संचालक नहीं माने। वह अपनी एंबुलेंस खड़ी करने से बाज नहीं आते, लेकिन यह भी है कि कई बार गंभीर मरीजों को तुरंत इनकी सेवा मिलने से जान भी बच जाती है।

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