बरेली: सड़क निर्माण में इस्तेमाल पत्थर जांच में फेल
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम कई सड़कों के निर्माण करा रहा है लेकिन इसमें कई काम मानकों के अनुरूप होते नहीं मिल रहे हैं। इसी कड़ी में शहदाना चौराहे से कांकरटोला चौराहा होते हुए जगतपुर तिराहे तक बनाई जा रही सीसी रोड का निर्माण भी गुणवत्ता के अनुरूप नहीं मिला। इस रोड को बनाने के …
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम कई सड़कों के निर्माण करा रहा है लेकिन इसमें कई काम मानकों के अनुरूप होते नहीं मिल रहे हैं। इसी कड़ी में शहदाना चौराहे से कांकरटोला चौराहा होते हुए जगतपुर तिराहे तक बनाई जा रही सीसी रोड का निर्माण भी गुणवत्ता के अनुरूप नहीं मिला।
इस रोड को बनाने के लिए बजरी का आकार भी मानक के अनुरूप नहीं है। निर्माण को लेकर कई और खामियां भी मिली हैं। इन्हें गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के मुख्य अभियंता निर्माण ने ठेकेदार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता खराब कर गड़बड़ी कर रही कई दूसरी फर्मों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य अभियंता बीके सिंह ने बताया कि वार्ड 71 व 53 में शहदाना रोड से कांकरटोला चौकी, जगतपुर तिराहा होते हुए गणपति स्वीट्स तक हॉटमिक्स सड़क सुधार सीसी टाइल्स साइड पटरी कार्य व आंशिक भाग पर नाली निर्माण और सीसी सड़क सुधार कार्य के लिए एक फर्म को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने 14 जुलाई को निर्माणाधीन स्थल का निरीक्षण किया। स्थल पर सीसी रोड का कार्य शुरू हो रहा था।

मौके पर बेस उचित प्रकार से तैयार नहीं किया गया था। निर्माण के लिए लाया गया पत्थर, गिट्टी का आकार भी मानक अनुरूप नहीं था। हाटमिक्स, सीसी टाइल्स और नाली निर्माण, सीसी सड़क में खामियां समेत तमाम गोलमाल मिले। निर्माण कार्य मानक अनुरूप नहीं कराया जा रहा है। इससे निर्माण कार्य पर सवालिया निशान लग रहे हैं। निर्माण का यह काम मैसर्स अग्रवाल कांट्रेक्टर को दिया गया है।
मुख्य अभियंता निर्माण ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित फर्म पर अर्थदंड के रूप में 50 हजार का जुर्माना लगाया है। ठेकेदार पर की गई कार्रवाई के संबंध में मेयर डॉ. उमेश गौतम के साथ ही नगर आयुक्त अभिषेक आनंद को भी अवगत करा दिया गया है। लेखाधिकारी संबंधित अधिशासी अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मेयर पहले ही सड़कों के निर्माण को लेकर उठा चुके कई सवाल
मेयर डॉ. उमेश गौतम ने नगर निगम के माध्यम से करोड़ों रुपये से बनवाई गईं सड़कों पर नाराजगी जाहिर करते हुए नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता निर्माण से इन मामलों की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए निर्देशित किया था। इसके बाद निर्माण विभाग के इंजीनियरों के बीच काफी खलबली मच गई थी। इसमें तमाम सड़कें ऐसी थी, जो तीन से छह महीने के अंदर ही टूट गई थी। इससे इनके निर्माण में हुई कमीशनखोरी और घपलेबाजी खुद ब खुद उजागर हो रही थी लेकिन बाद में यह मामला दब गया।
मेयर डॉ. उमेश गौतम ने बताया कि निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जनता से जुड़े जो काम किए जा रहे हैं उनकी गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
