बरेली: 75 फीसद दंपति के दो ही बच्चे, परिवार नियोजन का नजीर बना कंथरिया गांव

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बरेली, अमृत विचार। राज्य सरकार जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अब कानून ला रही है लेकिन बिथरी चैनपुर ब्लॉक के कंथरिया गांव के ग्रामीण पहले से ही इस कानून की राह पर चलकर नजीर बने हुए हैं। गांव के 75 फीसद दंपति इतने जागरूक हैं कि उनके मन में दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने का …

बरेली, अमृत विचार। राज्य सरकार जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अब कानून ला रही है लेकिन बिथरी चैनपुर ब्लॉक के कंथरिया गांव के ग्रामीण पहले से ही इस कानून की राह पर चलकर नजीर बने हुए हैं। गांव के 75 फीसद दंपति इतने जागरूक हैं कि उनके मन में दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने का कभी ख्याल नहीं आया।

सरकार की नीति के साथ गांव वाले

ग्राम पंचायत बालीपुर-अहमदपुर के अंतर्गत आने वाले कंथरिया गांव के ग्रामीण कहते हैं कि सरकार को यह नीति बहुत पहले ही लागू कर देनी चाहिए ताकि बच्चों को बेहतर परवरिश के साथ उन्हें अच्छी शिक्षा दी जा सके। दो से अधिक बच्चे होने पर मां-बाप भी वर्तमान स्थिति में ज्यादा बोझ नहीं सह पाते हैं, क्योंकि महंगाई के इस दौर में आमदनी अठन्नी और खर्च रुपया हो रहा है। वैसे आम धारणा है कि शहर के लोगों के साथ शिक्षित लोगों में ही परिवार नियोजन को लेकर अधिक जागरुकता होती है लेकिन कंथरिया गांव के ग्रामीणों ने सभी कथनों को झूठा साबित कर दिया।

75 फीसद दंपति के केवल दो बच्चे

गांव के तकरीबन 75 फीसद दंपति ऐसे हैं जिनके केवल दो ही बच्चे हैं। ये सालों से राज्य सरकार की जनसंख्या नियंत्रण नीति का पालन स्वत: करते आ रहे हैं। 350 मतदाता वाले कंथरिया गांव के लोग कहते हैं कि दो बच्चे पैदा करने के बावजूद उनके गांव में सुख-सुविधाओं का बड़ा अभाव है। गांव में कई लोग ऐसे हैं जिनको प्रधानमंत्री आवास तक नहीं मिला। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में करीब 40 परिवार हैं, जिनमें से लगभग 10 से ज्यादा परिवारों के पास पक्के मकान तक नहीं हैं।

इनकी सुनिए

गांव में अधिकतर लोग ऐसे हैं जिनके केवल दो ही बच्चे हैं, सरकार ने जो नीति बनाई है वह हमारा भविष्य सभी को बराबर संसाधन मिलें यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। नहीं तो जनसंख्या विस्फोट के साथ-साथ बेरोजगारी और भुखमरी अपने चरम पर होगी। – नीटू सिंह पटेल

57 साल की उम्र हो गई मजदूरी करके जैसे-तैसे परिवार चलाया। अगर बच्चे ज्यादा पैदा करते तो उनके रहने का भी इंतजाम करना पड़ता, उस हिसाब से न तो जमीन है और न ही घर, इसलिए केवल दो बच्चे ही अच्छे। -हीरा लाल, ग्रामीण

पति मजदूरी करते हैं, बहुत अधिक कमाई नहीं हो पाती है इसलिए परिवार बढ़ा नहीं किया। दो बच्चे पैदा करने का फैसला पति भगवानदास के साथ मिलकर ही लिया, ताकि दोनों बेटों की परवरिश ठीक से हो सके। -सुनीता देवी,गृहणी

दोनों बेटे बड़े हो चुके हैं पत्नी राम बेटी से जब शादी हुई तभी हमने फैसला किया था कि केवल दो बच्चे ही पैदा करने हैं। क्योंकि छोटा परिवार सुखी परिवार होता है। सरकार की जनसंख्या नियंत्रण नीति बिल्कुल सही है।
सत्यवीर,ग्रामीण

नीति तो ठीक हमारा क्या होगा
दंपति राजू और शशि बताते हैं कि उनका मकान कच्चा है, इतना पैसा नहीं कि पक्का बनवा सकें, कई बार प्रधान से कहा लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ, दो ही बच्चे हैं और आगे भी कोई संतान पैदा करने का इरादा नहीं है क्योंकि उन्हे पालने के लिए संसाधन नहीं। सरकार जनसंख्या नियंत्रण नीति लेकर आई है लेकिन उनके गांव में तो पहले से ही अधिकतर लोगों के दो बच्चे हैं। उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही है।

महंगाई के आगे परिवार नियोजन को चुना
राजेश और उनकी पत्नी बताते हैं कि इस महंगाई के कारण दो बच्चों से ज्यादा पैदा करने के बारे में सोचा भी नहीं। आर्थिक स्थिति जो भी हो छोटे परिवार के साथ काफी सुखी हैं। सरकार की नीति बिल्कुल सही है। हमारे गांव में अधिकतर लोगों के दो संताने हैं। यह गांव जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के मामले में लोगों के लिए एक नजीर साबित हो सकता है।

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