लखीमपुर-खीरी: दुधवा के जंगलों में लापता हो गई बरेली की शर्मीली

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पलियाकलां/लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। बरेली की रबर फैक्ट्री परिसर से एक माह पूर्व पकड़ कर लाई गई बाघिन शर्मीली दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़े जाने के बाद दोबारा न किसी वन कर्मचारी को दिखाई दी और न जंगल में जगह जगह-जगह लगाए गए कैमरे में ही कैद हुई है। 18 जून को बरेली वन …

पलियाकलां/लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। बरेली की रबर फैक्ट्री परिसर से एक माह पूर्व पकड़ कर लाई गई बाघिन शर्मीली दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़े जाने के बाद दोबारा न किसी वन कर्मचारी को दिखाई दी और न जंगल में जगह जगह-जगह लगाए गए कैमरे में ही कैद हुई है।

18 जून को बरेली वन प्रभाग के संरक्षित वन क्षेत्र से भटक कर मीरगंज की एक रबर फैक्ट्री पहुंची बाघिन शर्मीली मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व संजय पाठक के निर्देशन में अधीनस्थ कई अधिकारियों व चिकित्सकों की देखरेख में वन विभाग के एक वाहन में पिंजड़े में कैद कर लाई गई थी।

जिसे दुर्लभ वन्य जंतुओं के लिए डीटीआर की सबसे सुरक्षित एवं उपयोगी माने जाने वाली सोनारीपुर रेंज के जंगल में 19 जून को सकुशल छोड़ा गया था जहां वह पिंजड़े से बाहर निकलते ही तेज गति से जंगल में चली गई। वनअधिकारियों को लगा कि नए माहौल में सामंजस्य बैठाने में उसे कुछ वक्त लगेगा। लेकिन उसके बाद से वह वनकर्मियों को दिखाई दी न ही जगल में लगे कैमरों में उसकी फोटो नजर आई।

वह कहां लापता हो गई इसके बारे में कोई कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। हालांकि दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि बाघिन शर्मीली के पग चिन्ह एक-दो बार देखे गए हैं। जंगल में छोड़े जाने के कुछ दिन बाद गश्त के दौरान एक बार बाघिन हल्की सी गस्ती दल को दिखाई भी दी थी।

दुधवा में पहले भी लापता हो चुके हैं कई बाघ
करीब चार वर्ष पूर्व बाहर से पकड़कर दुधवा में छोड़े गए बाघ चंदू का भी दोबारा पता नहीं चल सका। हालांकि काफी दिनों तक दुधवा पार्क के अधिकारी और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी यह कहते रहे कि वह दुधवा छोड़ नेपाल के चीसापानी जंगल की ओर चला गया है। इसके अतिरिक्त करीब दो वर्ष पूर्व शाहजहांपुर ,पीलीभीत बॉर्डर से भी एक बाघिन पकड़ कर यहां छोड़ी गई थी। उसका भी फिर कोई पता नहीं चल सका।

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