मुरादाबाद: दावे हुए हवा-हवाई…खेतों से गांवों की ओर बढ़ा रामगंगा नदी का पानी, प्रशासन बेखबर
मुरादाबाद, अमृत विचार। बारिश के बाद रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से सिविल लाइंस नागफनी व भोजपुर थाना क्षेत्र के तमाम गांव व इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यहां पर पानी का बहाव लगातार जारी है। किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं। यह आलम तब है जबकि न तो अभी …
मुरादाबाद, अमृत विचार। बारिश के बाद रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से सिविल लाइंस नागफनी व भोजपुर थाना क्षेत्र के तमाम गांव व इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यहां पर पानी का बहाव लगातार जारी है। किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं। यह आलम तब है जबकि न तो अभी ढंग से बरसात ही हुई है, न ही पहाड़ों से पानी छोड़ा गया है। ऐसे में लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। किसी अनिष्ट की आशंका के चलते नदी किनारे गांवों में बसे ग्रामीणों की नींद उड़ चुकी है। वे रात में जागने को विवश हैं।

वहीं प्रशासन के कानों पर इसको लेकर जूं तक नहीं रेंगी है। पीड़ित ग्रामीणों की सुधि लेने के लिए अब तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। बाढ़ को लेकर सतर्कता बरतने के दावे प्रशासन द्वारा किए जा रहे हैं। लेकिन, अब जब तमाम गांव पानी का स्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। किसी भी अधिकारी ने वहां पहुंच गांववासियों की परेशानी जानने का प्रयास तक नहीं किया है।

भोजपुर थाना क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में मानसून की पहली बारिश के बाद उत्पन्न इस स्थिति ने ग्रामीणों को बेचैन कर दिया है। अभी से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है, साथ ही गांवों का मुख्यालय से संपर्क भी टूटने लगा है। गांवों की ओर जाने वाले रास्ते पर तीन दिन से लगातार पानी का बहाव जारी है। वाहन चालकों के अलावा पैदल राहगीर जान जोखिम में डालकर इस बहाव से होकर गुजरने को मजबूर हैं। इसके बाद भी प्रशासन की अनदेखी का आलम यह है कि अभी तक ग्रामीणों को राहत देने और उनका हाल जानने की सुध नहीं ली गई है।
रामगंगा में बढ़ा 35 सेंटीमीटर पानी
गंगा नदी में डिस्चार्ज बढ़ने के साथ ही आसपास के इलाकों में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हालाकि सिंचाई विभाग गंगा नदी से मुरादाबाद का सीधा कनेक्शन नहीं मान रहा है, जबकि 24 घंटे के अंतराल पर कटघर गेज पर रामगंगा के जलस्तर में 35 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। नदी का डेंजर लेवल 190.60 है। गुरुवार को इसका जलस्तर 189. 65 मीटर रहा। इस प्रकार यह खतरे के निशान को छूते हुए बह रही है। जबकि रामनगर स्थित कोसी नदी में 3,26,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उधर, हरिद्वार में 1,04,936 तथा बिजनौर में 73,678 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। छिटपुट बारिश की वजह से शहरी क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इस्लाम नगर, अगवानपुर और आसपास के क्षेत्र में खेतों में पानी का दबाव बना हुआ है।
अधिकारियों की उदासीनता से परेशान ग्रामीण
बुधवार को सड़क पर पानी आने के कारण राहगीरों को काफी परेशानी हुई। कुछ युवाओं ने पानी के तेज बहाव के बीच बाइक निकालने का प्रयास किया तो वे बीच धार में फंस गए। किसी तरह उन्हें निकालने के बाद राहगीरों को राहत देने के लिए कुछ युवा ट्रैक्टर लेकर आ गए। इसके बाद उन्होंने दिन भर वाहन चालकों को बाइक द्वारा सड़क पार करवाई। मौके पर मौजूद ग्रामीण किसी तरह वाहनों को धक्का देकर पार करवा रहे हैं। दो दिन से परेशानी से जूझ रहे ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासन की अनदेखी से बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि अभी तक किसी भी अफसर ने क्षेत्र का दौरा कर उनकी सुधि नहीं ली है, जबकि उनकी फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। घबराए ग्रामीणों का कहना है कि मामूली बारिश के बाद यह हाल है तो आगामी दिनों में इन गांवों में बाढ़ से तबाही मचना तय है।
प्रशासन जलभराव वाले गांवों पर बनाए हुए है नजर
उप जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशांत तिवारी कोसी नदी के पानी से प्रभावित लालपुर, टिकरी, हरपाल नगर आदि गांवों का दौरा किया है। रामगंगा में जलस्तर काफी नीचे है। लेकिन, प्रशासन जलभराव वाले गांवों पर नजर बनाए हुए है। फसल की क्षति का आंकलन शुरू कर दिया गया है। लोग जलस्तर बढ़ने अथवा फसलों के नुकसान को लेकर किसी भी समय कंट्रोल रूम को जानकारी दे सकते हैं। राजस्व और सिंचाई विभाग की टीमें क्षेत्र में संपर्क बनाए हुए हैं।
लोगों ने बयां की पीड़ा
हर साल हम लोगों को यह दंश झेलना पड़ता है। मैं खेत पर फसल देखने आया था। पानी भरा होने के कारण इस बार भी धान की फसल बर्बाद होना तय है। इस सबके बाद भी कोईअधिकारी अब तक नहीं पहुंचे हैं। -नाजिम, अक्का
तीन दिन से लगातार सड़क पर पानी चल रहा है। हमारी फसलें डूब गई हैं, राहगीर परेशान हैं। लेकिन, अभी तक कोई भी अधिकारी हमारा हाल-चाल जानने यहां नहीं आया है। -राजा, गनीमत नगर
पानी का बहाव काफी तेज है। जरा सी लापरवाही किसी के भी जीवन पर भारी पड़ सकती है। डर बना हुआ है कि कहीं अचानक पानी न बढ़ जाए, इसलिए जाग कर रात गुजारनी पड़ रही है।-सतपाल, पीपलसाना
गन्ने की बात छोड़ दी जाए तो खेतों में पानी घुसने से धान की फसल पूरी तरह डूब गई है। सैकड़ों बीघा फसल प्रभावित हो रही है। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।-मोहम्मद मियां, अक्का
