लखनऊ: अश्लील मैसेज व फोटो को लेकर लविवि सतर्क, पहले भी आ चुके हैं ऐसे…

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कला संकाय के प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग में पढ़ाई के लिए बनाए गए व्हॉट्सएप ग्रुप में 17 और 21 जुलाई को एक ही नंबर से अश्लील मैसेज आने के बाद विश्वविद्यालय ने सतर्क हो गया हैं। फिलहाल इसी नंबर से बीते साल भी अश्लील मैसेज व फोटो आए थे। जिस नंबर …

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कला संकाय के प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग में पढ़ाई के लिए बनाए गए व्हॉट्सएप ग्रुप में 17 और 21 जुलाई को एक ही नंबर से अश्लील मैसेज आने के बाद विश्वविद्यालय ने सतर्क हो गया हैं। फिलहाल इसी नंबर से बीते साल भी अश्लील मैसेज व फोटो आए थे। जिस नंबर से प्राचीन भारतीय इतिहास (एआईएच) विभाग के व्हॉट्सग्रुप में अश्लील मैसेज तीन बार भेजे गए हैं। उसी नंबर से पिछले साल भी हिन्दी के व्हॉट्सग्रुप पर अश्लील मैसेज भेजे गए थे। पुलिस की कोई कार्यवाही नहीं होते देख उस अराजकतत्व की हिम्मत बढ़ गई और एक साल के बाद अब प्राचीन भारतीय इतिहास के व्हॉट्सग्रुप में एक नहीं बल्कि तीन-तीन बार अश्लील मैसेज भेजने के साथ ही शिक्षक और छात्र-छात्राओं के लिए अपशब्द कहे गए।

इस पर कुलपति आलोक कुमार राय ने सभी विभागों को सुझाव दिया है कि कक्षा संचालित करने के लिए बनाए गए किसी भी ग्रुप में छात्र को एडमिन न बनाया जाए, सिर्फ शिक्षकों को ही एडमिन की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। कुलपति ने हिदायत दी कि व्हॉट्सएप ग्रुप जांच करने के बाद ही में छात्र को जोड़ना चाहिए। बीती 17 जुलाई को लिंक के माध्यम से ग्रुप में जुड़े एक नम्बर से अश्लील मैसेज आए। इसके बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. दिनेश कुमार ने हसनगंज थाने में तहरीर दी। पुलिस की लापरवाही के कारण 21 जुलाई को पहले वाले ही नंबर दोबारा उस ही लिंक से जुड़कर अश्लील मैसेज भेजे गए। नम्बर को रिमूव करने के बाद उस नम्बर से एक नया ग्रुप बनाकर फिर अश्लील मैसेज भेजे गए। इसके बाद 22 जुलाई को हसनगंज थाने में तहरीर दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जानकारों की मानें तो व्हॉट्सग्रुप में किसी को जोड़ने के लिए दो ही रास्ते होते हैं। पहला कि स्वयं नंबर से जोड़ लिया जाए और दूसरा लिंक बना दिया। विवि में लिंक बनाकर छात्रों को जोड़ना सबसे बड़ी गलती हुई। जब व्यक्ति स्वयं किसी नंबर को जोड़ता है तो कांटेक्ट लिस्ट में वह नंबर सेव होता है लेकिन लिंक में ऐसा नहीं होता है। लिंक जिसके पास भी हो वह एक क्लिक से ग्रुप में जुड़ सकता है। प्राचीन भारतीय इतिहास के व्हॉट्सग्रुप में छात्रों को जोड़ने के लिए लिंक बनाया गया था। जो एक छात्र से दूसरे छात्र के पास बढ़ता गया। संभवता किसी ग्रुप मं लिंक डाल दिया गया और वहीं से कोई अराजक तत्व ग्रुप में आ गया। कुलपति व विभाग से जुड़े अन्य शिक्षकों का मानना है कि जो भी है वह विवि का छात्र नहीं है। जांच के बाद साफ हो जाएगा कि कौन है। जिस नम्बर से अश्लील मैसेज भेजे गए वह नम्बर ट्रू कॉलर पर क्रिमिनल और व्हॉट्स पर माफिया लिखा हुआ दर्शा रहा है।

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