बरेली: तालाब-पोखरों पर कब्जा, जल संरक्षण का सपना अधूरा

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बरेली, अमृत विचार। गांवों में पट्टे पर दिए गए तालाब और पोखर पर कई जगह अवैध कब्जे हो गए हैं। इस कारण शासन की जल संरक्षण की मुहिम को झटका लग रहा है। जारी रिपोर्ट में जिले में करीब 57 तालाबों और पोखरों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दबंगों का कब्जा है। इससे इन …

बरेली, अमृत विचार। गांवों में पट्टे पर दिए गए तालाब और पोखर पर कई जगह अवैध कब्जे हो गए हैं। इस कारण शासन की जल संरक्षण की मुहिम को झटका लग रहा है। जारी रिपोर्ट में जिले में करीब 57 तालाबों और पोखरों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दबंगों का कब्जा है। इससे इन तालाबों में मत्स्य पालन कर आजीविका चला रहे मछुआरों, अनुसूचित जाति और जन-जाति के गरीबों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

बहेड़ी, शेरगढ़, आंवला समेत कई ब्लॉकों में तो निवर्तमान प्रधानों ने नियम ताक पर रखकर अपने करीबियों को ही तालाब सौंप दिए। कई जगहों पर तो तालाबों को पाटकर वहां अवैध मकान बनाने की शिकायत की जा चुकी है।

मनरेगा कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जिले में छोटे-बड़े करीब पांच हजार तालाब व पोखर हैं। ग्राम सभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्राकृतिक तालाब और पोखर ग्राम सभा के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। ग्राम प्रधान के हस्तक्षेप पर इनका आवंटन होता है। उनको बस संबंधित विभाग को इसकी जानकारी देनी होती है।

विभागीय कर्मी बताते हैं नियमानुसार ज्यादातर तालाबों को मत्स्य पालन और ¨सिंघाड़ा उत्पादन के लिए मछुआ समुदाय आदि को दिया जाता रहा है लेकिन आंवला, नवाबगंज और आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक में ही करीब 57 तालाबों और पोखरों का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। हालांकि जिम्मेदारों का दावा है कि बड़ी संख्या में तालाबों को कब्जामुक्त कराने के साथ ही खुदाई व सफाई कराई जा चुकी है ताकि मानसूनी सीजन में शासन की जल संरक्षण की मंशा को पलीता न लग पाए।

शासन से यह हैं नियम
शासनादेश के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र के तालाब ग्राम सभा के क्षेत्र में आते हैं। ग्राम प्रधान इन तालाबों को मत्स्य पालन और ¨सिंघाड़ा उत्पादन के लिए नियमानुसार गांव के ही मछुआ समुदाय के व्यक्ति को देता है। गांव में मछुआ समुदाय का व्यक्ति न हो तो तालाब अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसी परिवार को दिया जाता है। पट्टे दिए जाने के लिए तहसील में खुली बोली लगती है। अधिकतम बोली लगाने वाले को तालाब 10 वर्षों के लिए दे दिया जाता है लेकिन ग्राम प्रधान नियमों के विरुद्ध तालाब अपने करीबियों को दे रहे हैं। कई तालाबों के पट्टों का नवीनीकरण भी नहीं हो सका है।

डीसी, मनरेगा गंगाराम वर्मा ने बताया कि तलाबों और पोखरों पर अवैध कब्जा करने वाले निवर्तमान ग्राम प्रधान हों या उनके करीबी अथवा कोई और, किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ग्रामीणों की शिकायत पर गंभीरता से जांच कराने के बाद निश्चित ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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