बरेली: पर्यावरण प्रेमी बोले- प्रकृति से छेड़छाड़ के चलते विलुप्त हो रहे पक्षी

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बरेली, अमृत विचार। राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र इकाई प्रथम, बरेली कॉलेज व उद्भव सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की पूर्व संध्या पर घर-परिसर में पक्षी विषय पर ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बरेली कॉलेज के प्राचार्य डा. अनुराग मोहन ने अतिथियों का …

बरेली, अमृत विचार। राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र इकाई प्रथम, बरेली कॉलेज व उद्भव सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की पूर्व संध्या पर घर-परिसर में पक्षी विषय पर ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बरेली कॉलेज के प्राचार्य डा. अनुराग मोहन ने अतिथियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि आज मनुष्य यह मानने लगा है कि यह भूमि मेरे उपभोग के लिए है और मैं इसका उपभोक्ता हूं इसलिए मनुष्य ने प्राकृतिक संघटकों के साथ छेड़छाड़ प्रारंभ कर दी है, जिससे वह नष्ट हो रहे हैं। आज हमें प्राकृतिक संरक्षण की बात करनी पड़ रही है। विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक डा. अजय कुमार श्रोती ने कहा कि 1990 के दशक के बाद आज हमारा प्राकृतिक संसाधनों से लगाव कम हुआ है। पक्षी धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं, जो कहीं ना कहीं हमारा प्रकृति के प्रति नीरस स्वभाव का ही परिणाम है इसलिए समय रहते हैं हमें चेतना होगा।

विश्वविद्यालय कार्यक्रम समन्वयक रासेयो डा. सोमपाल सिंह ने सभी स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई एवं सामाजिक कार्य के लिए प्रेरित किया। उद्भव सोशल वेलफेयर सोसाइटी के उपाध्यक्ष, कार्यक्रम के संयोजक डा. उमराव सिंह ने कहा कि कोरोना काल में किए गए कार्यों की तरह सोसाइटी आगे भी सामाजिक कार्य करती रहेगी।

मुख्य वक्ता सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्रकृति विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डा. मंची शिरीष एस ने बताया कि पक्षी मनुष्य से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। मनुष्य ने जाने-अनजाने में कितने ही पक्षियों की प्रजातियों की पारिस्थितिकी को नष्टकर या बिगाड़ कर समूल नाश किया है। आज घर व परिसर में पक्षियों के संवर्धन के लिए हमें प्राकृतिक वातावरण का निर्माण करना पड़ेगा।

अपने घरों व परिसरों में अलग-अलग प्रकार के वृक्ष लगाए जाने चाहिए जिनसे पक्षियों को खाना मिले अथवा उनका प्रजनन आसानी से हो सके। यदि पौधरोपण तालाब अथवा नदियों के किनारे किया जाए, तब पक्षियों की विभिन्न प्रकार की प्रजातियों को आसानी से संरक्षित किया जा सकता है। आसपास के क्षेत्र को हमको शहरी हरित क्षेत्र में बदलना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन स्वयंसेवक पुनीत यादव ने किया। कार्यक्रम के अंत में रासेयो छात्र इकाई प्रथम के कार्यक्रम अधिकारी व वनस्पति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक डा. राजीव यादव ने बताया कि उक्त ई-संगोष्ठी में 10 राज्यों व प्रदेश के 62 से अधिक जनपदों के प्रोफेसर, रासेयो के स्वयंसेवक तथा छात्र-छात्राएं जुड़े हैं।

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