विडंबना: जहां लगेंगे बालिगों को टीके, वहीं पढ़ेंगे स्कूली बच्चे
नरेंद्र देव, हल्द्वानी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) चीख-चीख कर कह रहा है कि संक्रमण बच्चों के लिए घातक है और फिर भी अगर अफसर तीसरी लहर को खुद आमंत्रण दें तो क्या कहें। अर्से बाद राज्य में 2 अगस्त यानी आज से कक्षा नौ से 12 तक के स्कूल खोले जा रहे हैं। अब स्कूल …
नरेंद्र देव, हल्द्वानी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) चीख-चीख कर कह रहा है कि संक्रमण बच्चों के लिए घातक है और फिर भी अगर अफसर तीसरी लहर को खुद आमंत्रण दें तो क्या कहें। अर्से बाद राज्य में 2 अगस्त यानी आज से कक्षा नौ से 12 तक के स्कूल खोले जा रहे हैं। अब स्कूल की एक छत के नीचे बच्चे भी पढ़ेंगे और उसी छत के नीचे कोरोना वैक्सीन केंद्र भी संचालित होंगे।
ये समस्या इसलिए गंभीर है क्योंकि तीसरी लहर आने के संकेत हैं और संकट बच्चों पर मंडरा रहा है। संकट इसलिए भी बड़ा है कि न तो अभी तक बच्चों को वैक्सीन लगी है और ही किसी देश में वैक्सीन बनी है। ऐसे में ही एक छत के नीचे वैक्सीनेशन और पढ़ाई सीधे तौर पर तीसरी लहर को आमंत्रण हैं। स्वास्थ्य विभाग का ये अजब-गजब फैसला कहीं बच्चों की जान जोखिम में न डाल दे।
नैनीताल जिले की बात करें तो यहां करीब 30 स्कूल ऐसे हैं जहां पर कोविड के टीके लगाए जा रहे हैं। इन 30 स्कूलों में सैकड़ों बच्चे 2 अगस्त से पढ़ाई करेंगे और यहीं पर रोजाना सैकड़ों लोगों को कोरोना के टीके लगाए जाएंगे। संक्रमण के नजरिए से यह स्कूल पहले से ही काफी संवेदनशील था। इसके बावजूद स्कूलों को बच्चों के लिए खोले जाने के बावजूद यहां पर टीकाकरण बंद नहीं किए जाएंगे। टीके के लिए लोगों की भीड़ भी रहेगी और साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी साथ की जाएगी। विभाग का यह अजब फरमान समझ से बाहर है। जबकि जिन स्कूलों में टीकाकरण नहीं हो रहा है, उन्हें सैनेटाइज भी किया जा रहा है। इधर, टीकाकरण केंद्र वाले स्कूलों में रोजाना बाहरी लोगों की भीड़ की वजह से सैनेटाइजेशन का भी कोई असर नहीं पड़ेगा।
बहरहाल, स्कूलों की संवेदनशीलता तो देखते हुए पूरे लॉकडाउन में फेज टू फेज कर्फ्यू में कई तरह की छूट मिली, लेकिन सरकार ने स्कूल खोलने का फैसला नहीं लिया। अब जब संक्रमण की रफ्तार बेहद सुस्त है तब कहीं जा कर सरकार ने स्कूलों को खोलने पर सहमति दी, लेकिन शायद सरकार के अफसरों ने स्कूलों की संवेदनशीलता को दरकिनार कर दिया है। जबकि पहले अनुमान था कि जिन स्कूलों में टीकाकरण केंद्रों को संचालित किया जा रहा है, वहां से इन केंद्रों को शिफ्ट किया जाएगा।
पढ़ाई में होगा व्यवधान
टीकाकरण केंद्रों में भीड़ लगी रहती है। औसतन हर टीकाकरण केंद्र पर प्रत्येक दिन तीन सौ से चार सौ लोग आते हैं। वहां आए दिन विवाद भी होते रहते हैं। ऐसे में स्कूलों को पढ़ाई के लिए एकांत न छोड़ना गलत है।
सीएमओ ने की थी केंद्र बदलने की बात
सीएमओ डाॅ. भागीरथी जोशी ने पिछले दिनों कहा था कि जिन स्कूलों में टीकाकरण केंद्र चलाए जा रहे हैं, उन केंद्रों को कहीं और शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि अब ऐसा नहीं किया जा रहा है।
जिन स्कूलों को टीकाकरण केंद्र बनाया गया है, वहां पर टीकाकरण चलता रहेगा। टीकाकरण के साथ ही पढ़ाई होगी।
-केके गुप्ता, मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल
