सावधानी रखनी होगी
कोरोना संक्रमण की नियंत्रित स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की योगी सरकार ने कोविड दिशा निर्देशों का पालन करते हुए 16 अगस्त से माध्यमिक, इंटरमीडिएट स्कूलों को खोलने का फैसला किया है। कोरोना महामारी की वजह से पिछले करीब एक साल से प्रदेश में स्कूल बंद थे। अब माध्यमिक और इंटरमीडिएट के परिणाम …
कोरोना संक्रमण की नियंत्रित स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की योगी सरकार ने कोविड दिशा निर्देशों का पालन करते हुए 16 अगस्त से माध्यमिक, इंटरमीडिएट स्कूलों को खोलने का फैसला किया है। कोरोना महामारी की वजह से पिछले करीब एक साल से प्रदेश में स्कूल बंद थे।
अब माध्यमिक और इंटरमीडिएट के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं तो स्कूलों का खोला जाना जरूरी भी था। आईसीएमआर ने भी स्कूल खोलने का सुझाव दिया था। एम्स डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने पिछले महीने ही स्कूलों को खोलने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत से कम संक्रमण दर वाले जिलों में स्कूलों को खोलने की योजना बनाई जा सकती है। कई राज्यों में बड़े बच्चों के लिए स्कूल पहले ही खोले जा चुके हैं।
कुछ में इसकी तैयारी चल रही है। वहीं कई राज्य ऐसे भी हैं, जो स्कूलों को खोलने या न खोलने पर अभी कोई फैसला नहीं ले पाए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह तीसरी लहर की आशंका है। इस वजह से कोरोना को लेकर अभी भी सजग और सचेत रहने की जरुरत है। उधर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे ने कहा कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर निश्चित रूप से आ रही है।
वायरस के नए म्यूटेंट या कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने में आम जनता की ढिलाई के कारण ही तीसरी लहर आ सकती है। पिछले मंगलवार को आए चौथे सीरो सर्वे के नतीजे एक शुभ संकेत जरूर है लेकिन जिस तरह वायरस के नए स्वरुप ठीक हो चुके लोगों और वैक्सीन लगवा चुके लोगों को भी चपेट में ले रहे हैं, उसे देखते हुए काफी एहतियात बरती जानी चाहिए। यही वजह है कि प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को खोलने से राज्य हिचक रहे हैं।
टीकाकरण को ही तीसरी लहर को रोकने के लिए कारगर हथियार माना जा रहा है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि टीकाकरण और मास्क पहनने से निश्चित रूप से तीसरी लहर की तीव्रता को सीमित किया जा सकता है। देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण चल रहा है और इसका लाभ भी मिला है। टीके को लेकर लोगों में अभी भी भ्रम की स्थिति है।
वे टीका लगवाने को लेकर आशंका प्रकट करते हैं कि टीकाकरण के बाद होने वाले दुष्प्रभाव परेशान करते हैं। जबकि जानकार इसे लेकर चिंता न करने की सलाह देते हैं। स्कूल खोले जाने पर स्वास्थ्य विभाग को 18 वर्ष से अधिक आयु के विद्यार्थियों के टीकाकरण के लिए विशेष शिविर लगाने चाहिए।
