चिंता की बात
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कोरोना महामारी की दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है। मई में संक्रमण के प्रतिदिन एक लाख से अधिक मामले आ रहे थे। अब रोजाना चालीस हजार के बीच संक्रमण के मामले आना चिंता की बात है। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 42,982 नये मामले सामने आए …
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कोरोना महामारी की दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है। मई में संक्रमण के प्रतिदिन एक लाख से अधिक मामले आ रहे थे। अब रोजाना चालीस हजार के बीच संक्रमण के मामले आना चिंता की बात है। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 42,982 नये मामले सामने आए हैं। देश के 12 राज्यों के 44 जिलों में कोरोना वायरस की संक्रमण दर दस फीसदी से अधिक बनी हुई है। केरल, महाराष्ट्र व दिल्ली में लगातार बढ़ते संक्रमण मामलों के बाद ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि क्या ये तीसरी लहर की दस्तक है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोविड-19 का बेहद संक्रामक डेल्टा स्वरूप अब 135 देशों में सामने आ चुका है और अगले हफ्ते तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल वैश्विक मामले 20 करोड़ के पार चले जाएंगे। पिछले सप्ताह दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में सबसे अधिक 2,83,923 नए मामले भारत से हैं। उधर चीन में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप का प्रकोप बढ़ता दिख रहा है।
कोरोना संक्रमण के मूल स्रोत वुहान में फिर संक्रमण के बाद चीन ने एक करोड़ लोगों की जांच की बात कही है। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी चीन में ‘बंद’ की रणनीति को फिर से अपना रही है। संक्रमण के ये नए मामले ऐसे कई लोगों में भी सामने आए हैं, जिन्होंने कोविड-19 रोधी टीके की खुराक ले ली है। एक ओर दुनिया में गरीब मुल्कों को टीके नसीब नहीं हैं और विकसित देशों के लोग टीके लगवाने से गुरेज कर रहे हैं।
भारत में देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 48.93 करोड़ खुराक दी जा चुकी है। चिंता यह है कि क्या देश में साल के अंत तक 94 करोड़ वयस्क आबादी को टीके लग पाएंगे? सरकारी तंत्र की अपनी सीमाएं और अज्ञानतावश टीका लगाने से मना करने वाले लोगों को समझाना भी एक चुनौती है। सरकार व विपक्षी दलों को राजनीति से मुक्त होकर टीकाकरण अभियान को तेज करने में सहयोग देने की जरूरत है।
दूसरी लहर के धीमा होने के बाद सरकारों ने प्रतिबंध या तो हटा लिए हैं या कम कर दिए हैं। कुछ राज्यों में स्कूल भी खोल दिए गए हैं। लेकिन छूट का मतलब लापरवाही कदापि नहीं है। यह शोध का विषय है कि टीकाकरण से व कोरोना संक्रमण के बाद कितने लोगों की एंटी बॉडीज विकसित हुई लेकिन आसन्न तीसरी लहर को हकीकत मानते हुए सरकार को निगरानी बढ़ाने और बचाव के उपायों का सख्ती से पालन कराने के अलावा विकल्प नहीं है।
