नैनीताल: उत्तराखंड में खोले गए स्कूलों के मामले पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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नैनीताल, अमृत विचार। हाइकोर्ट ने 2 अगस्त से कक्षा 6 से 12 तक के स्कूल खोले जाने के मामले पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान और न्यायाधीश आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई। बता …

नैनीताल, अमृत विचार। हाइकोर्ट ने 2 अगस्त से कक्षा 6 से 12 तक के स्कूल खोले जाने के मामले पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान और न्यायाधीश आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई।

बता दें कि देहरादून निवासी याचिकाकर्ता विजय पाल सिंह के द्वारा जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार द्वारा 31 जुलाई 2021 के शासनादेश को भी चुनोती देते हुए कहा कि इसमें कई तरह की खामियां है। क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र के स्कूल इन मानकों को पूरा नहीं कर सकते हैं। शासनादेश में लिखा है कि स्कूल दो पालियों में खोले जाएंगे।

पहली पाली में 9 से 12 तक कक्षाओं के बच्चे शामिल होंगे, जिनकी कक्षाएं चार घंटे चलेंगी। दूसरी पाली में 6 से 8 तक की कक्षाएं चलेंगी। मध्याह्न में कक्षाओं को पूर्ण रूप से सैनेटाइजेशन किया जाएगा। शनिवार व रविवार को स्कूल जिला प्रशाशन, नगर पालिका व स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सैनेटाइज होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रत्येक जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी की होगी जो करना नामुकिन है क्योंकि सरकारी स्कूलों में इतनी व्यवस्थाएं नहीं हैं। दुर्गम क्षेत्रों में इसका पालन कराना और भी नामुकिन है।

जीओ में यह भी कहा है कि बिना अभिभावकों के सहमति के बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा और कक्षाएं ऑनलाइन और भौतिक रूप से चलेंगी। इसमें समस्याएं आएंगी क्योंकि पिछले डेढ़ साल से बच्चों की स्कूल जाने की आदत छूट चुकी है, लिहाज सरकार के आदेश पर रोक लागई जाए।

उत्तराखंड में कैबिनेट की बैठक ने निर्णय लेकर 2 अगस्त से कक्षा 6 से 12 तक के स्कूलों को खोलने का आदेश जारी किया, जिसे याचिककर्ता के द्वारा हाई कोर्ट में चुनौती दी है और कहा है कि प्रदेश में कोरोना के केस अभी भी मिल रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में अभी भी कई लोगों को वैक्सीन की पहली डोज तक नहीं लगी है। इस बीच सरकार द्वारा स्कूल खोले जाने का निर्णय गलत है। जब शहरों में एसओपी का पालन नहीं हो पा रहा है तो स्कूलों में कहां से होगा वहां तो इतने साधन तक नहीं है।

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