अच्छा कदम
शुक्रवार को लोकसभा में ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2021’ को मंजूरी प्रदान कर दी गई। जिसमें भारतीय परिसंपत्तियों के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर कर लगाने के लिए पिछली तिथि से लागू कर कानून, 2012 के जरिए की गई मांगों को वापस लिया जाएगा। पिछली तारीख से कराधान लंबे समय से लंबित मुद्दा है। यह विधेयक एक …
शुक्रवार को लोकसभा में ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2021’ को मंजूरी प्रदान कर दी गई। जिसमें भारतीय परिसंपत्तियों के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर कर लगाने के लिए पिछली तिथि से लागू कर कानून, 2012 के जरिए की गई मांगों को वापस लिया जाएगा। पिछली तारीख से कराधान लंबे समय से लंबित मुद्दा है।
यह विधेयक एक अच्छा और स्वागत योग्य कदम है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सरकार के पिछली तारीख से कराधान को समाप्त करने के फैसले को सही समय पर उठाया गया सही कदम करार दिया। अमेरिकी मंच यूएसआईएसपीएफ ने भी सरकार के पिछली तिथि से कर लगाने का कानून वापस लेने की सराहना की है।
आशा है कि विधेयक देश में और अधिक अंतरराष्ट्रीय निवेश को प्रोत्साहित करेगा तथा साथ ही यह उन कंपनियों के लिए एक स्वागत योग्य राहत है, जिन्होंने देश में लंबे समय से निवेश किया है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने वर्ष 2012 के आम बजट में पिछली तारीख से कर लगाने का अजीब प्रावधान जोड़ा था जिसके तहत आय कर अधिकारी पुराने लेनदेन पर कर लगा सकते थे।
यदि लेनदेन विदेश में हुआ हो लेकिन उस लेनदेन में चिह्नित परिसंपत्तियों पर पूंजीगत लाभ हुआ हो तो उसे भी भारत में स्थित माना जाता। भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए इसका विरोध किया था और कहा था कि यह प्रावधान कानून सम्मत नहीं है और निवेशकों की भावना के प्रतिकूल भी है। निवेशक चकित थे कि 2014 के बाद आई सरकार ने भले ही 2012 के पुरानी तारीख से कर वसूली के प्रावधान की आलोचना की थी लेकिन उसने इसे कानून से बाहर करने का प्रयास नहीं किया।
पुरानी तिथि से कर मांग के प्रावधान ने कई विवादों को जन्म दिया। इनमें प्रमुख है 2012 से जारी वोडाफोन और सरकार का मामला। 2012 के बाद नए सिरे से अधिकार प्राप्त आय कर कार्यालय ने अन्य मामलों में भी तेजी दिखाई जिनमें केयर्न का मामला शामिल है।
अब सरकार ने कहा है कि वह केयर्न एनर्जी और वोडाफोन जैसी कंपनियों पर इस तरह की कर मांग को वापस लेगी और उनसे जुटाए गए करीब 8,100 करोड़ रुपये लौटाएगी। ध्यान रहे कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार और रोजगार को बढ़ावा देने में विदेशी निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। 2012 के संशोधन को कानूनी रूप से बहुत पहले पलट देना चाहिए था। शायद हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस शर्मिंदगी से बचने का मौका मिल जाता जिसका सामना हाल के दिनों में ऐसी कर मांग के मामलों में करना पड़ा है।
