नैनीताल: सेब की उन्नत प्रजातियों ने दिल्ली, मुंबई में दिलाई काश्तकारों को पहचान

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गौरव जोशी, नैनीताल। अब सरोवर नगरी नैनीताल पर्यटन के साथ-साथ फल उत्पादन में देश-विदेश में पहचान बना रही है । नैनीताल का फल पट्टी क्षेत्र सेब के अलावा आड़ू, पुलम, खुमानी समेत विभिन्न प्रकार के पहाड़ी फलों के लिए जाना जाता है। जिले के मुक्तेश्वर समेत आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के फलों …

गौरव जोशी, नैनीताल। अब सरोवर नगरी नैनीताल पर्यटन के साथ-साथ फल उत्पादन में देश-विदेश में पहचान बना रही है । नैनीताल का फल पट्टी क्षेत्र सेब के अलावा आड़ू, पुलम, खुमानी समेत विभिन्न प्रकार के पहाड़ी फलों के लिए जाना जाता है।

जिले के मुक्तेश्वर समेत आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के फलों का उत्पादन होता है इनमें सेब मुख्य है। इन दिनों मुक्तेश्वर,रामगढ़, खपरॉड समेत आसपास के क्षेत्रों में सेब की बंपर फसल हुई है। इससे पहाड़ का काश्तकार अब खुश है।  क्षेत्रीय काश्तकार विद्यासागर बताते हैं कि इस बार पूरे फल पट्टी क्षेत्र में सेब की बंपर पैदावार हुई है और सेब की मांग दिल्ली, महाराष्ट्र, कोलकाता समेत कई बड़े महानगरों में हो रही है।

रोजाना उनके पास सेब के ऑर्डर आ रहे है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बागों में डिलीशियस, फैनी, स्काटा स्कर्ट लेट स्पर ( इटली ), ग्रेनी स्मिथ ( ग्रीन स्वीट), जर्मनी, रेड चीफ, (हॉलैंड) रेड स्पर डेलिसस, रेड कॉर्न, मिजगाला, किंग रॉड, रेड लमगाला प्रजातियों का उत्पादन किया जा रहा है। इससे काश्तकारों को फायदा हो रहा है।  वह बताते हैं कि बीते कुछ समय पहले जो युवा रोजगार की तलाश में महानगरों की तरफ जा रहे थे अब सभी युवा पहाड़ों पर सेब उत्पादन की तरफ बढ़ रहे हैं जिससे पहाड़ो में हो रहे पलायन पर रोक लगी है।

युवा काश्तकार बृजेश कुमार बताते हैं कि कई सालों तक दिल्ली में एक कंपनी में काम किया लेकिन कुछ समय पहले वह घर लौटे। रोजगार के लिए सेब की खेती करने का फैसला किया और अब उन्हें सेब की खेती में काफी फायदा हो रहा है। गांव के कई युवाओं को रोजगार भी दिया है।

 

 

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