कृषि निर्यात का दायरा
देश की पहचान एक बड़े कृषि निर्यातक की बन रही है। कोरोना काल में ही भारत ने कृषि निर्यात के नए कीर्तिमान बनाए हैं। कृषि निर्यात के मामले में भारत पहली बार दुनिया के शीर्ष 10 देशों में पहुंचा है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के …
देश की पहचान एक बड़े कृषि निर्यातक की बन रही है। कोरोना काल में ही भारत ने कृषि निर्यात के नए कीर्तिमान बनाए हैं। कृषि निर्यात के मामले में भारत पहली बार दुनिया के शीर्ष 10 देशों में पहुंचा है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 11 हजार करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की। वास्तव में देश खाद्य तेल की अपनी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहें, ये उचित नहीं है। दूसरी ओर देश में बंपर पैदावार के बाद किसानों को फसलों के उचित दाम नहीं मिल पाते हैं। कमज़ोर घरेलू कीमतों और किसानों की बढ़ती निराशा के बीच फसलों का निर्यात बढ़ाने की ज़रूरत भी है।
अमेरिका और चीन के बीच छिड़े व्यापार युद्ध से भारत के लिए निर्यात संभावनाएं बढ़ी हैं। हालांकि कृषि निर्यात को 2022 तक दोगुना करने का लक्ष्य है। भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में अनार के लिए बाजार की पहचान की है। इसके अलावा अर्जेंटीना में आम और बासमती चावल, ईरान में गाजर के बीज, उज्बेकिस्तान में गेहूं का आटा, बासमती चावल, आम, केला और सोयाबीन खली, भूटान में टमाटर, भिंडी और प्याज और सर्बिया में संतरे के लिए बाजार मिला है। देश के 80 प्रतिशत से अधिक किसानों के पास दो हेक्टेयर तक ही जमीन है। आने वाले वर्षों में देश की कृषि को समृद्ध करने में इन छोटे किसानों की बहुत बड़ी भूमिका रहने वाली है।
अब देश की कृषि नीतियों में इन छोटे किसानों को प्राथमिकता देने की शुरुआत हो चुकी है। इस मिशन के तहत ऑयल-पाम की खेती को प्रोत्साहन देने के साथ ही अन्य पारंपरिक तिलहन फसलों की खेती को भी विस्तार दिया जाएगा। खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता का मिशन देश में बड़े स्तर पर रोजगार का निर्माण करेगा, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बल देगा।
ऑयल-पाम की खेती का बहुत बड़ा लाभ देश के छोटे किसानों को मिलेगा। इसके लिए सरकार को तय करना होगा कि किसानों को उत्तम बीज से लेकर तकनीक, उसकी हर सुविधा मिले। केंद्र और राज्य सरकारों को किसानों को शिक्षित बनाना होगा ताकि वे कीटनाशकों और एंटीबायोटिक का उचित इस्तेमाल करके अपनी उपज को इनके घातक असर से बचाएं। देश में प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यात का दायरा बहुत बड़ा है, लेकिन इसके लिए हमें प्रभावी कोल्ड चेन की आवश्यकता है। यदि निर्यात में वृद्धि करनी है तो सरकार को बुनियादी ढांचे में निवेश करने की ज़रूरत है।
