उम्मीदों को झटका

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Edited By Amrit Vichar
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अफगानिस्तान में बिगड़ते हालातों के बीच वहां फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी के लिए केंद्र सरकार कोशिशों में लगी है। लेकिन वहां से भारतीयों के निकलने की उम्मीदों को झटका लगा है। काबुल और दिल्ली के बीच सभी उड़ानों को रद कर दिया गया है। पिछले मंगलवार को काबुल स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों …

अफगानिस्तान में बिगड़ते हालातों के बीच वहां फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी के लिए केंद्र सरकार कोशिशों में लगी है। लेकिन वहां से भारतीयों के निकलने की उम्मीदों को झटका लगा है। काबुल और दिल्ली के बीच सभी उड़ानों को रद कर दिया गया है। पिछले मंगलवार को काबुल स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को तुरंत अफगानिस्तान छोड़ने की सलाह दी थी।

भारतीय नागरिकों से कहा गया था कि वे भारत लौटने के लिए तत्काल यात्रा की व्यवस्था करें। दूतावास ने 29 जून और 24 जुलाई को जारी किए गए दो सुरक्षा परामर्शों में अफगानिस्तान में मौजूद भारतीय कंपनियों को भी भारतीय कर्मचारियों को तुरंत स्वदेश भेजने की सलाह दी गई थी। साथ ही कहा गया था भारतीय नागरिक वाणिज्यिक हवाई सेवाओं के बंद होने से पहले भारत लौटने की तत्काल यात्रा व्यवस्था करें।

अब उड़ानें रद होने से वहां रह गए भारतीयों की वापसी अधर में लटक गई है। ऐसे में सरकार को काबुल हवाईअड्डे से लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। अमेरिका समर्थित अफगान सरकार के गिर जाने के बाद रविवार को तालिबान के आतंकवादियों ने काबुल पर कब्जा जमा लिया और राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए।

तालिबान ने आश्चर्यजनक रूप से कुछ ही सप्ताह में पूरे अफगानिस्तान को कब्जे में ले लिया। देश में अब तालिबान का राज स्थापित हो चुका है। जिसके बाद से अफगानिस्तान में भगदड़ मची हुई है। राजधानी काबुल में करीब 400 भारतीय फंसे हैं, जिनमें दूतावास कर्मचारी भी शामिल हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से अफगानिस्तान के एक गुरुद्वारे में फंसे 200 सिखों समेत सभी भारतीयों को निकालने का आग्रह किया है। अमेरिका, यूरोपीय देशों और अन्य समेत 60 से अधिक देशों ने कहा है कि अफगानिस्तान छोड़कर जाने वाले विदेशी नागरिकों को सुरक्षित रूप से वहां से निकलने का अवसर मिलना चाहिए। अफगानिस्तान की स्थिति बहुत नाजुक मोड़ पर है।

हालांकि तालिबान ने देश में शांति का नया युग लाने का वादा किया है। फिर भी देखना होगा कि अफगानिस्तान के साथ हमारे भविष्य की रणनीति क्या होगी। हमारे सामरिक हित भी अफगानिस्तान के मामले में दाव पर लगे हैं। वहां हमारे राजनयिकों और नागरिकों की सुरक्षा के मद्देनजर केद्र सरकार से एक परिपक्व राजनीतिक, रणनीतिक एवं कूटनीतिक प्रतिक्रिया की उम्मीद की जानी चाहिए। उधर संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान में सभी से ‘संयम’ दिखाने का आग्रह किया है। आगे के लिए एकमात्र राह वार्ता से राजनीतिक समाधान निकालना है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान के साथ संपर्क में रहना चाहिए।