लखनऊ: लूट व ठगी के तीन आरोपियों को एसटीएफ ने दबोच

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लखनऊ। लूट व ठगी की घटनाओं को अंजाम देने वाले तीन शातिरों को एसटीएफ ने धरदबोचा है। इसी गिरोह ने 8 अगस्त को लोहिया पार्क के पास डा. पार्थ से 6 लाख रुपये लूट लिए थे। लुटेरे लोगों को बड़ी नोटो के बदले ज्यादा संख्या में छोटी नोट देने की बात कहकर बुलाते थे। व्यक्ति …

लखनऊ। लूट व ठगी की घटनाओं को अंजाम देने वाले तीन शातिरों को एसटीएफ ने धरदबोचा है। इसी गिरोह ने 8 अगस्त को लोहिया पार्क के पास डा. पार्थ से 6 लाख रुपये लूट लिए थे। लुटेरे लोगों को बड़ी नोटो के बदले ज्यादा संख्या में छोटी नोट देने की बात कहकर बुलाते थे। व्यक्ति के मौके पर पहुंचने पर उसका रुपया छीनकर मौके से फरार हो जाते थे। डा. पार्थ को भी इन लोगों ने छह लाख रुपये के बदले 7.20 लाख रुपये देने का झांसा दिया था।

इनका गिरोह उत्तर प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली में भी सक्रिय है। आरोपियों ने कानपुर में भी दो व्यापारियों से दस व पांच लाख रुपये लूटने की बात कुबूली है। शातिरों ने बताया कि उनके द्वारा लूटे या ठगे गए ज्यादातर लोग पुलिस में शिकायत ही नहीं दर्ज कराते हैं। एसटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार अभियुक्तों में राशिद अहमद उर्फ अजय शर्मा, विजय प्रधान व अजीत मौर्या शामिल हैं। इनके कब्जे से टीम ने चार लाख बत्तिस हजार रुपये नगद, एक टाटा सफारी, एक बाइक व छह मोबाइल बरामद किए हैं। इनकी गिरफ्तारी सोमवार देर शाम गोमतीनगर स्थित बैडमिंटन एकैडमी के पास से की गई है।

विभिन्न शहरों में फैले हैं 25 एजेंट

एसटीएफ पूछताछ में शातिरों ने बताया की उनके गिरोह में कई सक्रिय सदस्य हैं। यह सदस्य लखनऊ के साथ ही देश व प्रदेश के अलग-अलग शहरों में फैले हैं। इनका काम ही सीधे-साधे लोगों को ठगने का ही है।

बड़े नोट के बदले ज्यादा छोटे नोट देने का लालच

आरोपी लोगों को बड़े नोट बदले ज्यादा संख्या में छोटे नोट देने का झांसा देते थे। आरोपी किसी व्यापारी से कहते थे कि वह अगर उन्हें दो हजार व पांच सौ रुपये के नोटो के जरिए पांच लाख रुपये दे तो वह लोग उसे 50,20 व सौ रुपये की धनराशि के नोटों के जरिए छह लाख रुपये देंगे। इसी झांसे में आकर लोग रुपये लेकर उनके बताए स्थान पर पहुंचते। जिसके बाद गिरोह के सदस्य रकम लूटकर मौके से फरार हो जाते। इस दौरान कोई दिक्कत होने पर गिरोह के अन्य सदस्य फर्जी एसटीएफ व पुलिसकर्मी बनकर भी मौके पर पहुंच जाते और किसी भी तरह से रकम को अपने कब्जे में कर लेते थे।

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