वैश्विक कर्तव्य

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Edited By Amrit Vichar
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अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा पूरी दुनिया को स्तब्ध करने वाला है। दुनिया के सभी देशों को मिलकर वहां तत्काल लोकतंत्र की बहाली के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन में लगे भारत जैसे देश अधिक चितिंत हैं। आखिर भारत का इस समस्या से क्या रिश्ता है और वहां लोकतंत्र की बहाली …

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा पूरी दुनिया को स्तब्ध करने वाला है। दुनिया के सभी देशों को मिलकर वहां तत्काल लोकतंत्र की बहाली के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन में लगे भारत जैसे देश अधिक चितिंत हैं। आखिर भारत का इस समस्या से क्या रिश्ता है और वहां लोकतंत्र की बहाली हमारे देश के लिए क्यों जरूरी है।

अफगानिस्तान से भारत के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। वहां बौद्ध धर्म की मौजूदगी और उसका लंबे समय तक प्रभाव रहा है। अविभाजित भारत के समय वह हमारा प्रत्यक्ष पड़ोसी रहा है। आज भी वहां के लोगों एवं भारतीय नागरिकों के बीच निजी, सामूहिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक संबंध हैं। एक उदारवादी लोकतांत्रिक ताकत के रूप में भारत ने अफगानिस्तान में शिक्षा, सिंचाई, बिजली के वैकल्पिक साधनों तथा लोकतांत्रिक प्रतीकों को स्थापित करने के लिए जो अरबों डॉलर खर्च किए थे, उसके बट्टेखाते में जाने की आशंका के चलते भी हमारी अफगानिस्तान को लेकर चिंता करना जायज होगा।

अब अफगानिस्तान को दुनिया की बड़ी ताकतों ने अकेला छोड़ दिया है। बल्कि, अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सेना ने भी बिना कोई लड़ाई किए ही अपने हथियार डाल दिए। कुल मिलाकर कहें कि अब दुनिया ने ये मान लिया है कि अफगानिस्तान पर तालिबान का राज क़ायम हो गया है तो वहां लोकतंत्र को लौटाने में खासकर, भारत को सभी के सहयोग से सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

तालिबान के राजनीतिक चेहरे तो अपने बर्ताव में बदलाव लाने के लिए भरोसा दे रहे हैं लेकिन, असल में ज़मीन पर काम करने वाले तालिबान के जंगी कमांडर ही हैं, जो विदेशी जिहादियों के साथ मिलकर लड़ते रहे हैं। अब उनके बारे में कौन फ़ैसला करेगा, ये तो आने वाले समय में ही जान सकेंगे। ऐसे में भारत को लंबी लड़ाई के लिए तैयारी करनी चाहिए। इसमें अफगानिस्तान में अपने दोस्तों को भारत में शरण देकर मदद करना शामिल है।

अफगानिस्तान में हालात बदले तो वो हमारे सबसे दमदार साथी होंगे। भारत सार्क देशों में सबसे बड़े भाई की तरह ही देखा जाता है। इस समय तो वह संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष भी है। ऐसे में उसे अपने रुतबे का इस्तेमाल करना होगा। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के प्रति उसका यह उत्तरदायित्व भी है। दुनिया में जहां कहीं भी मानवता खतरे में पड़ी है, भारत हमेशा से अपनी आवाज बुलंद करता रहा है तथा पीड़ितों के लिए सहायता का हाथ बढ़ाता रहा है। फिर, लोकतंत्र का हिमायती होने के नाते यह उसका वैश्विक कर्तव्य भी है।