महिला प्रबोधिनी फाउंडेशन ने बनाई वैदिक राखी, संत महात्मा ने की मांग
वाराणसी। एक दंपति ने पूजन में प्रयोग होने वाले अक्षत, हल्दी, दूर्वा, शमी पत्र, कुमकुम और गाय के गोबर से भाइयों के लिए वैदिक राखियां बनाई हैं। दंपति जोड़े का कहना है कि ये राखी भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत और पावन बनाएगी। ये राखियां विंध्याचल स्थित महिला प्रबोधिनी फाउंडेशन की ओर से ग्रामीण …
वाराणसी। एक दंपति ने पूजन में प्रयोग होने वाले अक्षत, हल्दी, दूर्वा, शमी पत्र, कुमकुम और गाय के गोबर से भाइयों के लिए वैदिक राखियां बनाई हैं। दंपति जोड़े का कहना है कि ये राखी भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत और पावन बनाएगी। ये राखियां विंध्याचल स्थित महिला प्रबोधिनी फाउंडेशन की ओर से ग्रामीण महिलाओं तैयार की जा रही है। ये महिलाएं सभी बहनों को वैदिक राखी बांधने के लिए बोल रही हैं। इस राखी का आधार गाय के गोबर से तैयार किया जाता है। इसमें उरद दाल का चूर्ण, गोंद और मुल्तानी मिट्टी मिलाकर सूती कपड़े में बेस बनाकर इसे सुखाया जाता है। इसके बाद इसको पेंसिल से डिजाइन काटा जाता है। उसी डिजाइन में शमी के पत्ते को बिछाया जाता है।

दंपति जोड़े ने महिला ग्रामीण महिलाओं को रोजगार करने के लिए इस काम से जोड़ा है। प्रबोधिनी फाउंडेशन की अध्यक्ष नंदिनी मिश्रा ने बताया कि वो और उनके पति ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए पूरी तरह कि तैयारी कर रहे हैं। नंदिनी मिश्रा के पति फाउंडेशन के निदेशक विभूति मिश्रा हैं। उन्होंने बताया कि वैदिक राखी बनाने में करीब पांच दिन लगते हैं और सिर्फ 3 से 5 रुपए का खर्च आता है और बिक्री 25 रुपये की होती है।
इस काम से 50 ग्रामीण महिलाएं जुड़ चुकी हैं। अभी तक तकरीबन 1500 राखियां बिक चुकी है। विभूति मिश्रा ने बताया कि प्रयागराज, बनारस, भदोही, मीरजापुर क्षेत्रों में भी इसकी खूब मांग रही है। संत महात्मा, धमार्चार्य भी इस राखी की मांग कर रहे हैं।
