सिद्धू ने ट्वीट कर गन्ने की कीमतें बढ़ाने की मांग की
चंडीगढ़। गन्ने की कीमतों पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ किसानों की बैठक से पहले कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को कहा कि गन्ना किसानों की मांगों के अनुरूप गन्ने की कीमतें तत्काल बढ़ाई जानी चाहिए। सिद्धू ने यह भी कहा कि गन्ने का राज्य समर्थन मूल्य …
चंडीगढ़। गन्ने की कीमतों पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ किसानों की बैठक से पहले कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को कहा कि गन्ना किसानों की मांगों के अनुरूप गन्ने की कीमतें तत्काल बढ़ाई जानी चाहिए। सिद्धू ने यह भी कहा कि गन्ने का राज्य समर्थन मूल्य (एसएपी) वर्ष 2018 से नहीं बढ़ाया गया है जबकि इसका लागत मूल्य 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री गन्ने की कीमतों और बकाए के भुगतान पर किसान नेताओं से मंगलवार को मुलाकात करने वाले हैं। अपनी मांगों को ले कर किसानों का प्रदर्शन मंगलवार को पांचवे दिन भी जारी है और इन प्रदर्शनों से रेल सेवाएं तथा सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। सिद्धू ने ट्वीट किया कि गन्ना किसानों के लिए एसएपी 2018 के बाद से नहीं बढ़ा है, जबकि लागत मूल्य में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
Sugarcane farmers SAP has not increased since 2018, whereas input cost has increased by over 30%. Punjab model means policy interventions giving fair prices, equitable share in profits, diversification in production & processing to give more profits to both farmers & sugar mill.
— Navjot Singh Sidhu (@sherryontopp) August 24, 2021
पंजाब मॉडल का मतलब है किसानों और चीनी मिलों दोनों को उचित मूल्य, मुनाफे में समान हिस्सेदारी, उत्पादन और प्रसंस्करण में विविधता देने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप हो। क्रिकेटर से नेता बने सिद्धू ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि किसानों की मांगों के अनुरूप एसएपी को तत्काल बढ़ाया जाना चाहिए और बकाए का भुगतान किया जाना चाहिए।
किसानों और चीनी मिलों दोनों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए उच्च उत्पादकता और उच्च मूल्य के उपोत्पादों (बाइप्रोडक्ट) जैसे एथेनॉल, जैव ईंधन और बिजली आदि के लिए चीनी मिलों का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए। सिद्धू ने इस ट्वीट के एक दिन पहले कहा था कि पंजाब में गन्ने की कीमतें अधिक लागत मूल्य के बावजूद हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से कम हैं। उन्होंने राज्य के किसानों के लिए बेहतर कीमतों की मांग की थी।
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