तीसरी लहर और टीका
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आई खबर ने चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण की तीसरी लहर पर गृह मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है। यह सितंबर से अक्टूबर के बीच कभी भी आ सकती है। फॉर्मूला मॉडल के आधार पर पूर्वानुमान लगाने वाली टीम में शामिल वैज्ञानिक का कहना है कि तीसरी लहर नवंबर …
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आई खबर ने चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण की तीसरी लहर पर गृह मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है। यह सितंबर से अक्टूबर के बीच कभी भी आ सकती है। फॉर्मूला मॉडल के आधार पर पूर्वानुमान लगाने वाली टीम में शामिल वैज्ञानिक का कहना है कि तीसरी लहर नवंबर में चरम पर होगी। ऐसा तभी होगा अगर कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के अलावा और स्वरूप सामने आते हैं। उधर आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक ने कहा कि अगर वायरस का नया वैरिएंट नहीं आता है तो हो सकता है कि तीसरी लहर आए ही नहीं। विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं संक्रमण की तीसरी लहर का खतरा बच्चों के लिए अधिक होगा।
देश में बारह से अठारह साल के बीच की आबादी छब्बीस करोड़ के आसपास है। सरकारी रिपोर्ट और वैज्ञानिक दावों से अभिभावक उलझन में है। ऐसे में डीएनए आधारित जायडस कैडिला के तीन खुराक वाले टीके जाइकोव-डी को आपातकालीन उपयोग के लिए भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल की अनुमति मिलना बड़े कदम से कम नहीं है। यह टीका 12 साल से अधिक उम्र वालों के लिए है। 18 साल से ऊपर वालों के लिए देश में इससे पहले तीन टीकों, कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पूतनिक को मंजूरी मिली थी।
जाइडस का टीका इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि यह बच्चों के साथ बड़ों को भी दिया जा सकता है। यानी कोरोना वायरस के ताजा खतरनाक रूप डेल्टा वायरस पर तो यह कारगर है ही, संभावित नए रूपों के लिहाज से भी ज्यादा उपयोगी हो सकता है। निस्संदेह देश के महत्वाकांक्षी टीकाकरण अभियान को इस नए टीके के आने से गति मिलेगी। यह टीका सुई के जरिये नहीं लगेगा। बालकों का टीका आ जाना ही काफी नहीं है। अभी चुनौतियां और भी हैं।
हाल में कनाडा में एक शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि अगर तीन साल से छोटे बच्चे कोरोना संक्रमित हो जाते हैं तो घर के दूसरे बड़े सदस्यों के लिए जोखिम पैदा हो जाएगा। इसलिए दुनिया को अब छोटे बच्चों के टीके का भी इंतजार है। देश में अब तक लगभग 59 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। इसमें करीब 13 करोड़ लोगों को टीके की दोनों खुराक लगी हैं।
टीकाकरण अभियान में पहली खुराक देने को लेकर जितनी तेजी दिखाई जा रही है, उतनी ही तत्परता शायद दूसरी खुराक को लेकर नहीं दिखाई जा रही। साफ है कि टीकाकरण में तेजी लाने और नए-नए टीकों का इस्तेमाल करने के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर सावधानी बनाए रखने की जरूरत अभी काफी समय तक बनी रहने वाली है।
