हल्द्वानी: नैनीताल और ऊधम सिंह नगर में 750 लोगों को शोध के तहत सांपों के बचाव के लिए किया जा रहा है प्रशिक्षित
हल्द्वानी, अमृत विचार। सांप… शब्द सुनते ही मन में एक डर पैदा हो जाता है और लोग सांप को दुश्मन समझ कर खत्म करना चाहते हैं यह जाने बिना ही कि यह सांप जहरीला है भी या नहीं। इधर, मानव-सांप संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को लेकर वन विभाग एक शोध कर रहा है। इस शोध …
हल्द्वानी, अमृत विचार। सांप… शब्द सुनते ही मन में एक डर पैदा हो जाता है और लोग सांप को दुश्मन समझ कर खत्म करना चाहते हैं यह जाने बिना ही कि यह सांप जहरीला है भी या नहीं। इधर, मानव-सांप संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को लेकर वन विभाग एक शोध कर रहा है। इस शोध का मकसद जनता को सांपों के प्रति जागरूक करना और सांपों का संरक्षण है।
वन विभाग ने नेशनल मिशन ऑफ हिमालय स्टडीज के साथ सांपों पर शोध कर रहा है। यह शोध पश्चिमी वन वृत्त की पांच वन डिवीजनों तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, रामनगर, हल्द्वानी और दक्षिणी वन वृत्त की नैनीताल डिवीजन में किया जा रहा है। वन विभाग का मानना है कि नैनीताल-ऊधम सिंह नगर जिलों में सांपों का आतंक है।
यहां अजगर, कोबरा, करैल, रसेल, लाल मूंगा खुखरी सांप समेत कई प्रजातियां पाई जाती हैं। पिछले कुछ सालों में मानव-सांप संघर्ष बढ़ा है। सर्पदंश में कई लोगों को जान गंवानी पड़ी। वहीं आए दिन घर-दुकानों में सांप निकलने की घटनाएं होती हैं। वहीं इस संघर्ष में सांपों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसी के मद्देनजर वन विभाग नैनीताल और ऊधम सिंह नगर के 250 गांवों व कस्बों में 750 लोगों को प्रशिक्षण दे रहा है। इस प्रशिक्षण में सांपों की किस्म, पहचान, पकड़ने के तरीके, सांप के बचाव और सर्पदंश पर करने वाले उपायों के बारे में जानकारी दे रहा है ताकि मानव-सर्पदंश संघर्ष को कम से कम किया जा सके। ये प्रशिक्षित लोग सांपों के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे। सांपों को रेस्क्यू कर जंगल छोड़ने में वन विभाग की मदद करेगा। इससे सांपों के संरक्षण में मदद मिलेगी।
मुख्य वन संरक्षक डॉ. तेजस्विनी पाटिल ने सांपों के लिए अध्ययन हो रहा है। साथ ही लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसमें लोगों को सांपों के प्रकार, रेस्क्यू करने में मदद आदि की जानकारी दी जाएगी।
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण शोध संस्थान कोसी कटारमल (अल्मोड़ा) द्वारा राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत वन संरक्षक दक्षिणी कुमाऊं वृत (नैनीताल) डा. तेजस्वनी अरविंद पाटिल को सांपों पर शोध परियोजना सौंपी थी। अब विज्ञानियों ने भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के तकनीकी सहयोग से सांपों की वास्तविक स्थिति पर अध्ययन को विस्तार दिया है। विष व विषरहित प्रजातियों की सटीक पहचान कर डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। यह अध्ययन रिपोर्ट अन्य हिमालयी राज्यों के लिए भी अहम होगी।
विशेषज्ञों की मानें तो भारत में सापों की ज्यादातर प्रजातियां विषरहित हैं। विज्ञानियों के अनुसार उत्तराखंड के सर्वाधिक गरम तराई क्षेत्रों में चार प्रजातियां मसलन किंग कोबरा, नागराज, करैत व रसेल वाइपर ही प्रमुख जहरीली प्रजातियां हैं। प्रदेश की करीब 30 प्रजातियों में से अधिसंख्य जहरीली नहीं हैं। दूसरी यह भी सच है कि देश में सालाना करीब 58 हजार लोग सर्पदंश से दम तोड़ जाते हैं।
