बरेली: स्मार्ट सिटी की जरूरत पार्किंग, फिर भी किए टेंडर निरस्त

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बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के सुधार के लिए जहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जा रहे हैं, वहीं इस प्रोजेक्ट में शहर की बड़ी दिक्कत में एक पार्किंग व्यवस्था के लिए कोई काम न होने से लोगों के हाथ मायूसी लग रही है। पहले स्मार्ट सिटी के तहत घंटाघर …

बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के सुधार के लिए जहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जा रहे हैं, वहीं इस प्रोजेक्ट में शहर की बड़ी दिक्कत में एक पार्किंग व्यवस्था के लिए कोई काम न होने से लोगों के हाथ मायूसी लग रही है। पहले स्मार्ट सिटी के तहत घंटाघर के पास पहले मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव तैयार भी किया गया था लेकिन बाद में इसे निरस्त कर दिया गया।

अब घंटाघर के कायाकल्प का काम चल रहा है। इसलिए वहीं पास में जो वाहनों के खड़े करने की जगह थी भी, वह भी बंद हो गई। अब लोग कुतुबखाना के पास वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर रहे हैं। इससे यहां लोगों को आवागमन में काफी दिक्कत हो रही है।
शहर के विकास के लिए बहुत ही बड़े स्तर पर तैयार की गई स्मार्ट सिटी परियोजना में मनमाने तरीके से काम कराने और टेंडरों में गड़बड़ी की शिकायतें मेयर डॉ. उमेश गौतम ने शासन में पहुंचाई थी।

इस चिट्ठी के आधार पर मंडलायुक्त आर. रमेश कुमार से शासन ने दस बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट मांगी है। इसमें मल्टीलेवल कार पार्किंग के टेंडर को निरस्त करने का मामला भी शामिल है। स्मार्ट सिटी के तहत अधिकारियों ने करीब आठ करोड़ रुपये से मल्टीलेवल कार पार्किंग की परियोजना तैयार की थी, ताकि लंबे समय से शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में कार पार्किंग की समस्या झेल रहे कार स्वामियों को इस दिक्कत से छुटकारा मिल सके।

पहले यह पार्किंग कुतुबखाना चौराहा के पास मोती पार्क में बनाया जाना प्रस्तावित थी। यहां पार्किग बनने से यह राहत रहती थी कि उससे बड़ा बाजार, सब्जी मंडी, सर्राफा बाजार, जिला अस्पताल रोड सहित आसपास के मुख्य बाजारों के दुकानदारों और यहां आने वाले दुकानदारों को काफी राहत मिल जाती है लेकिन बाद में इसकी जमीन को लेकर पेच फंसाते हुए अफसरों ने इसके टेंडर को निरस्त कर दिया।

दिक्कत यह है कि एक ओर स्मार्ट सिटी के तहत जहां कई करोड़ के काम चल रहे हैं, वहीं इतने बड़े प्रोजेक्ट में शहर के लिए कोई बड़ा पार्किंग स्थल विकसित नहीं किया जाना लोगों को अखर रहा है। इस संबंध में मेयर डॉ. उमेश गौतम का कहना है कि मल्टीलेवल कार पार्किंग का प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी परियोजना में काफी महत्वपूर्ण था लेकिन अफसरों ने इसके टेंडर ही निरस्त कर दिए थे। जबकि शहर की यह बड़ी जरूरत है।

जनता के प्रस्ताव न शामिल कर गुपचुप बना ली कार्ययोजनाएं
शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कई अरब की योजनाएं बना ली गईं लेकिन सक्रिय रूप से जनता के सुझाव व आपत्तियों को शामिल नहीं किया गया, जबकि इस प्रोजेक्ट में ज्यादातर काम सीधे जनता से ही जुड़े थे।

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