खतरे की घंटी
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद देश से पलायन कर रहे हताश लोगों को निशाना बनाकर किए गए दो आत्मघाती बम धमाकों के एक दिन बाद अमेरिका ने काबुल हवाई अड्डे पर फिर आतंकी हमला होने को लेकर अलर्ट जारी किया है। काबुल हवाई अड्डे पर हुए धमाकों से दुनिया दहली हुई है। जबकि …
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद देश से पलायन कर रहे हताश लोगों को निशाना बनाकर किए गए दो आत्मघाती बम धमाकों के एक दिन बाद अमेरिका ने काबुल हवाई अड्डे पर फिर आतंकी हमला होने को लेकर अलर्ट जारी किया है। काबुल हवाई अड्डे पर हुए धमाकों से दुनिया दहली हुई है। जबकि अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने बुधवार को ही हादसे का अंदेशा जता दिया था।
तालिबान के डर से भाग रहे लोगों पर आतंकी संगठन इस्लामिक संगठन ने कहर ढाया है। अमेरिकी सैनिकों के लिए भी गुरुवार का दिन 20 वर्षों का सबसे बुरा और दर्दनाक दिन रहा। इन हमलों ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की इकतरफा वापसी के फैसले से पहले ही घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमेरिकी सैनिकों की मौत से बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमलावरों को कीमत चुकाने की धमकी दी है। हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट-ख़ुरासान ने ली है, जो इस्लामिक स्टेट समूह की अफगानिस्तान शाखा है।
माना जा रहा है कि जो बाइडन अपने सैनिकों पर हुए हमले के खिलाफ एक छोटी सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दे सकते हैं। वे अपने कमांडरों को आईएसआईएस खुरासान के ठिकानों, नेतृत्व और सुविधाओं पर हमला करने की योजना तैयार करने के आदेश दे चुके हैं। अफगानिस्तान अलग-अलग आतंकी संगठनों का केंद्र बन चुका है, जो आने वाले वक्त में पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आईएसआईएस खुरासान ने अपनी सक्रियता दर्ज करा दी है। आईएस ने दुनिया को अलग-अलग नामों से बांटा हुआ है।
जनवरी 2015 में इस्लामिक स्टेट ने अपनी ख़ुरासान ब्रांच स्थापित करने की घोषणा की थी। खुरासान उस हिस्से का नाम है, जिसमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल हैं। चिंता की बात है कि भारत में आईएस के स्लीपर सेल भी सक्रिय हैं। आईएसआईएस खुरासन का मुख्यालय अफगानिस्तान के नांगरहार में है, पाकिस्तान के बेहद नजदीक है। जानकारों के अनुसार हाल के महीनों में आईएस को तालिबान से कड़ी चुनौती मिली है। अपने प्रतिद्वंद्वी को बाहर करने के लिए तालिबान पूरी कोशिश कर रहा है। आईएस ने अफगान सुरक्षाबलों के बाद तालिबान को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताया है।
ये भी दिलचस्प है कि अफगानिस्तान में ज्यादातर आईएस लड़ाके तालिबान के पूर्व सदस्य हैं। अफगानिस्तान में तालिबान राज को इस्लामिक स्टेट अमेरिका के ही छद्म राज के रुप में देख रहा है। फिर भी तालिबान और आईएसआईएस खुरासान भले ही एक दूसरे के दुश्मन नजर आते हों लेकिन दोनों का चरित्र ऐसा जैसा ही है। काबुल में हुए धमाके दुनिया के लिए खतरे की घंटी हैं। ऐसे में दुनिया को आतंकवाद और आतंकवादियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने की जरुरत है।
