हल्द्वानी: बरसात में भी 50 हजार की आबादी पेयजल के लिए तरसी
हल्द्वानी, अमृत विचार। बरसात में भी हल्द्वानी में हजारों लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। दमुवाढूंगा में जहां फिल्टर प्लांट से पेयजल की आपूर्ति रूकी हुई है तो वहीं जगदंबा नगर में नलकूप फुंकने से पेयजल नहीं मिल पा रहा है। जल संस्थान के अधिकारी जल्द व्यवस्था सही किए जाने के दावे कर रहे …
हल्द्वानी, अमृत विचार। बरसात में भी हल्द्वानी में हजारों लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। दमुवाढूंगा में जहां फिल्टर प्लांट से पेयजल की आपूर्ति रूकी हुई है तो वहीं जगदंबा नगर में नलकूप फुंकने से पेयजल नहीं मिल पा रहा है। जल संस्थान के अधिकारी जल्द व्यवस्था सही किए जाने के दावे कर रहे हैं।
दमुवाढूंगा में पिछले तीन दिनों से लगभग 35 हजार की आबादी पेयजल के लिए तरस रही है। यहां पर ज्यादातर हिस्सों में जल संस्थान के फिल्टर प्लांट से पानी की सप्लाई की जाती है। फिलहाल यहां तीन दिन से पानी नहीं आ रहा है। जल संस्थान के एई नीरज तिवाड़ी ने बताया कि गौला में सिल्ट आने की वजह से पानी की किल्लत बनी हुई है।
रविवार तक पेयजल की आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी। इधर, जगदंबा नगर में नलकूप को खराब हुए तीन दिन हो गए हैं। अब भी यहां पर मरम्मत का काम चल रहा है। यहां पर करीब पांच हजार की आबादी पेयजल की किल्लत से जूझ रही है। यहां सोमवार तक नलकूप को ठीक किए जाने की बात विभागीय अधिकारी कह रहे हैं। एई रविंद्र कुमार ने बताया कि नलकूप की मोटर को बदल दिया जाएगा और पेयजल की आपूर्ति सुचारू हो जाएगी। इसके अलावा कुसुम खेड़ा, नवाबी रोड, मानपुर पश्चिम की लगभग 10 हजार की आबादी पेयजल संकट से जुझ रही है।
लोग बोले, पेयजल की व्यवस्था कराने में विभाग नाकाम
जल संस्थान ने पेयजल की व्यवस्था कराने के लिए ग्राहक सेवा केंद्र भी बनाया है। इसके बाद भी पेयजल की व्यवस्था कराने में विभाग नाकाम साबित हो रहा है। बारिश के दिनों में भी कई दिनों तक लोगों को पेयजल की किल्लत से जूझना से पड़ रहा है। कुसुमखेड़ा निवासी दीपक उप्रेती ने बताया कि पानी की व्यवस्था के लिए निजी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। दमुवाढूंगा निवासी जीवन बिष्ट का कहना है कि महीने में मुश्किल से 20 दिन ही पानी आता है और बिल पूरे महीने का भेजा जाता है।
टैंकर से की सप्लाई
पेयजल की किल्लत से जूझ रहे इलाकों में जलसंस्थान ने पानी की टैंकर भेजे हैं। जगदंबा नगर और दमुवाढूंगा में पानी के टैंकर से सप्लाई की गई। हालांकि बड़ी आबादी के लिए यह टैंकर नाकाफी साबित हो रहे हैं।
