अयोध्या: रामनगरी पहुंचे राष्ट्रपति , रामायण कांक्लेव का किया शुभारंभ, जानें क्या कहा…

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अयोध्या। रामनगरी अयोध्या पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रामकथा पार्क में दीप जलाकर रामायण कांक्लेव का शुभारंभ किया। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या मौजूद हैं। एक दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रेसीडेंसियल ट्रेन से सुबह 11:30 बजे अयोध्या …

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रामकथा पार्क में दीप जलाकर रामायण कांक्लेव का शुभारंभ किया। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या मौजूद हैं।

एक दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रेसीडेंसियल ट्रेन से सुबह 11:30 बजे अयोध्या स्टेशन पहुंचे जहां उनका सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत किया। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर अयोध्या धाम को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। सभी एंट्री प्वाइंट पर बैरियर लगा दिए गए हैं।

वहीं राष्ट्रपति के दौरे को लेकर विपक्ष के कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। उनके घरों पर पुलिस का पहरा है। हिन्दू महासभा के मनीष पांडेय, व्यापारी नेता नंद कुमार गुप्ता उर्फ नंदू को हाउस अरेस्ट किया गया है। तो वहीं गांधी पार्क व तिकोनिया पार्क में भारतीय किसान यूनियन के चल रहे धरने पर भी पुलिस का पहरा बिठा रखा है।

कही यह खास बात

-रामकथा की लोकप्रियता भारत में ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी है. उत्तर भारत में गोस्वामी तुलसीदास की रामचरित-मानस, भारत के पूर्वी हिस्से में कृत्तिवास रामायण, दक्षिण में कंबन रामायण जैसे रामकथा के अनेक पठनीय रूप प्रचलित हैं.
-विश्व के अनेक देशों में रामकथा की प्रस्तुति की जाती है. इन्डोनेशिया के बाली द्वीप की रामलीला विशेष रूप से प्रसिद्ध है. मालदीव, मॉरिशस, त्रिनिदाद व टोबेगो, नेपाल, कंबोडिया और सूरीनाम सहित अनेक देशों में प्रवासी भारतीयों ने रामकथा व रामलीला को जीवंत बनाए रखा है.
-रामकथा का साहित्यिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव मानवता के बहुत बड़े भाग में देखा जाता है. भारत ही नहीं विश्व की अनेक लोक-भाषाओं और लोक-संस्कृतियों में रामायण और राम के प्रति सम्मान और प्रेम झलकता है.
-मैं तो समझता हूं कि मेरे परिवार में जब मेरे माता-पिता और बुजुर्गों ने मेरा नाम-करण किया होगा तब उन सब में भी संभवतः रामकथा और प्रभु राम के प्रति वही श्रद्धा और अनुराग का भाव रहा होगा जो सामान्य लोकमानस में देखा जाता है.
-रामायण में राम-भक्त शबरी का प्रसंग सामाजिक समरसता का अनुपम संदेश देता है. महान तपस्वी मतंग मुनि की शिष्या शबरी और प्रभु राम का मिलन, एक भेद-भाव-मुक्त समाज व प्रेम की दिव्यता का अद्भुत उदाहरण है.
-निषादराज के साथ प्रभु राम का गले मिलना और उन दोनों का मार्मिक संवाद, समरसता, सौहार्द और प्रेम की उत्कृष्टता का अनुभव कराता है.
-अपने वनवास के दौरान प्रभु राम ने युद्ध करने के लिए अयोध्या और मिथिला से सेना नहीं मंगवाई. उन्होंने कोल-भील-वानर आदि को एकत्रित कर अपनी सेना का निर्माण किया. अपने अभियान में जटायु से लेकर गिलहरी तक को शामिल किया. आदिवासियों के साथ प्रेम और मैत्री को प्रगाढ़ बनाया.
-प्रभु राम द्वारा ऐसे समावेशी समाज की रचना, सामाजिक समरसता व एकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो हम सबके लिए आज भी अनुकरणीय है.
-सार्वजनिक जीवन में प्रभु राम के आदर्शों को महात्मा गांधी ने आत्मसात किया था. वस्तुतः रामायण में वर्णित प्रभु राम का मर्यादा-पुरुषोत्तम रूप प्रत्येक व्यक्ति के लिए आदर्श का स्रोत है.
गांधीजी ने आदर्श भारत की अपनी परिकल्पना को रामराज्य का नाम दिया है. बापू की जीवन-चर्या में राम-नाम का बहुत महत्व था.
-इस रामायण कॉन्क्लेव की सार्थकता सिद्ध करने हेतु यह आवश्यक है कि राम-कथा के मूल आदर्शों का सर्वत्र प्रचार-प्रसार हो तथा सभी लोग उन आदर्शों को अपने आचरण में ढालें. मैं कामना करता हूं कि जिस प्रकार रामराज्य में सभी लोग दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्त थे उसी प्रकार हमारे सभी देशवासी सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे.

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