बरेली: प्रधान पत्नियों की आड़ में गांव की सरकार चलाने वाले पतियों को झटका, कुर्सी पर बैठे तो छिनेगी प्रधानी
महिपाल गंगवार, बरेली। प्रधान पत्नियों की आड़ में गांव की सरकार चलाने वाले पतियों को बड़ा झटका लगा है। ग्राम पंचायत में उनका दखल खत्म करने के लिए सरकार ने पंचायत भवन में महिला प्रधानों के पतियों के पूर्णरूप से प्रवेश पर रोक लगा दी है। ग्राम पंचायत की बैठक में भी महिला प्रधानों के …
महिपाल गंगवार, बरेली। प्रधान पत्नियों की आड़ में गांव की सरकार चलाने वाले पतियों को बड़ा झटका लगा है। ग्राम पंचायत में उनका दखल खत्म करने के लिए सरकार ने पंचायत भवन में महिला प्रधानों के पतियों के पूर्णरूप से प्रवेश पर रोक लगा दी है। ग्राम पंचायत की बैठक में भी महिला प्रधानों के पति शामिल नहीं हो सकेंगे। यदि महिला प्रधान की सीट पर उनके पति, देवर या कोई और बैठे नजर आए तो प्रधानी खतरे में पड़ जाएगी। कुर्सी तक छिन सकती है।
अब महिला प्रधानों को ही पूर्णरूप से पंचायत भवन सहित अन्य सभी बैठकों, आयोजनों में भूमिका निभानी होगी। बरेली जनपद की बात करें तो 1193 ग्राम पंचायतों में इस बार 552 ग्राम पंचायतों की सीटों पर महिलाओं की कब्जेदारी है। पिछली प्रधानी में यह देखा गया कि महिला प्रधान घर में रहती थीं और उनके पति, देवर, बेटे या अन्य कोई पंचायत की बैठकें कर गांव की सरकार चलाकर अपना रुतबा झाड़ते थे। ऐसी तमाम शिकायतें सरकार तक पहुंची हैं। इसलिए राज्य सरकार ने आदेश जारी कर पतियों या महिला प्रधानों के अन्य परिजनों के दखल पर रोक लगा दी है।
प्रधानों पर इनकी होती है मुख्य जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत के चहुमुंखी विकास से लेकर केंद्र और राज्य सरकार की संचालित सभी योजनाओं का ग्रामीणों को लाभ दिलाने के लिए प्रधान की अहम भूमिका होती है। गांव की तस्वीर बदलने, शिक्षा समेत अन्य योजनाओं में अच्छा बजट भी मिलता है। पंचायतों की गोशालाओं की देखरेख, सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन सचिवालय संचालित करने में भी प्रधानों की भूमिका अहम होती है।
रजिस्टर में दर्ज होगी कार्रवाई
पंचायती राज विभाग के अधिकारी बताते हैं कि अब ग्राम पंचायत की बैठक में क्या शिकायतें आईं, उन पर क्या कार्यवाही की गई, इसकी डिटेल भी देनी पड़ेगी। पंचायत भवन में रखे रजिस्टर में सभी के हस्ताक्षर होंगे। सभी विभागों के एक-एक कर्मचारी की भी क्रमवार वहां उपस्थिति दर्ज होगी। पंचायत भवन की दीवार पर प्रत्येक विभाग के कर्मचारी का फोन नंबर अंकित होगा।
नगर पंचायतों का भी है यही हाल
जिले की कई नगर पंचायतों में भी कुछ इसी तरह का हाल है। चेयरमैन का चुनाव महिला ने जीता लेकिन कहीं बेटा कुर्सी संभाल रहा तो कहीं पति। शहर से सटी एक नगर पंचायत की बात करें तो चुनाव जतीने के बाद चेयरमैन ने अपने सारे दायित्व बेटे को सौंप दिए हैं। अधिशासी अभियंता भी इसको लेकर खासा नाराजगी जता चुके हैं, लेकिन मामला चेयरमैन से जुड़ा होने की वजह से वह चुप है।
ग्राम पंचायत की बैठक में महिला प्रधान को ही हिस्सेदारी लेनी होगी। महिला प्रधान के स्थान पर उनके पति या घर का कोई अन्य सदस्य को बैठक में भाग लेने का अधिकार नहीं है। महिला प्रधान होने पर बैठक में अब अगर उनके पति, देवर या अन्य कोई हिस्सा लेते मिले तो पंचायतीराज एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी। यहां तक की महिला प्रधान की प्रधानी भी छिन सकती है। -धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ
