अनियमित दिनचर्या बच्चों में बढ़ा रही टाइप-2 डायबिटिज

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बरेली, अमृत विचार। दाल-सब्जी रोटी छोड़कर फास्ट फूड समेत अन्य चीजें खाकर पेट भरना बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इस जीवनशैली से जहां बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है वहीं बच्चे टाइप-2 मधुमेह की चपेट में भी आ रहे हैं। जिला अस्पताल के ही आंकड़ों पर गौर करें तो साल भर में …

बरेली, अमृत विचार। दाल-सब्जी रोटी छोड़कर फास्ट फूड समेत अन्य चीजें खाकर पेट भरना बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इस जीवनशैली से जहां बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है वहीं बच्चे टाइप-2 मधुमेह की चपेट में भी आ रहे हैं। जिला अस्पताल के ही आंकड़ों पर गौर करें तो साल भर में जहां इक्का-दुक्का बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज के मामले सामने आते थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ रही है। छह महीने में 10 से 12 बच्चों में मधुमेह की पुष्टि हुई है।

चिकित्सक बताते हैं कि अभी तक बच्चों में ज्यादातर टाइप-1 मधुमेह के मामले देखने को मिलते थे। बदली दिनचर्या के चलते टाइप-2 मधुमेह भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक टाइप-2 मधुमेह जीवनशैली विकारों से होता है। अभिभावक बच्चों को जंक फूड और चॉकलेट तो खूब खिलाते हैं लेकिन व्यायाम से बच्चों को दूर रखते हैं।

कंप्यूटर, लैपटॉप, वीडियो गेम्स और मोबाइल गेम्स से ही बच्चे का खेलकूद पूरा हो जाता है। इन सब वजहों से बच्चों में अब टाइप-2 डायबिटीज के भी मामले तेजी से बढ़े हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. बागीश वैश्य ने बताया कि बच्चों में टाइप-2 प्रकाश की मधुमेह ज्यादा चिंतित करनी वाली है। इसमें इंसुलिन बनती है, लेकिन काम नहीं करती। यह जीवनशैली के कारण होने वाली मधुमेह है। एक शोध में मेट्रो शहरों का हर चौथा बच्चा और गैर मेट्रो शहरों का हर छठा बच्चा मोटापे का शिकार पाया गया है।

मोटापे की वजह से अधिक खतरा
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. राहुल बाजपेयी के अनुसार बच्चों में डायबिटीज टाइप-2 बहुत अधिक मोटापा, उच्च रक्तचाप, समय पर न सोने, सुबह देर तक सोने, बहुत अधिक नशा करना और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण भी होती है। इसका एक कारण शरीर में इंसुलिन कम बनना भी होता है। ऐसा कुछ शारीरिक कारणों या गलत खानपान के कारण भी हो सकता है। इंसुलिन कम बनने से रक्त में मौजूद कोशिकाएं हार्मोन के प्रति बहुत कम संवेदनशीलता दिखाती हैं। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है और व्यक्ति डायबिटीज टाइप-2 का शिकार हो जाता है।

बच्चे का रखें विशेष ध्यान

  • अगर बच्चे को डायबिटीज है तो उसके खानपान पर विशेष ध्यान दें।
  • नियमित रूप से रक्त की जांच कराएं। दवाएं दें, डॉक्टर से संपर्क करें।
  • डायट चार्ट के अनुसार बच्चों को भोजन दें।
  • कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, चॉकलेट, मिठाई, चावल, आलू से परहेज करें।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार दें। ज्यादा देर तक बच्चे को खाली पेट न रखें।
  • मोटे अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों में भी मधुमेह की जांच कराएं।
  • बच्चा स्कूल कैंटीन या बाहर क्या खाता है, इस बारे में उससे पता करें।

पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, अब मोबाइल पर जमे रहते हैं। यह टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है। जंक फूड, कोल्डड्रिंक, चॉकलेट खूब खाने से भी यह बीमारी पिछले पांच साल में पांच गुनी रफ्तार से बढ़ी है। -डा. बागीश वैश्य, वरिष्ठ फिजिशियन, जिला अस्पताल।

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