बरेली: विभागीय नजरे नहीं ढूंढ पा रही झोलाछापों को, शिकायत पर शुरू होता अभियान

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बरेली, अमृत विचार। जिले के शहरी व ग्रामीण इलाकों में चल रहे झोलाछाप व अपंजीकृत क्लीनिकों को स्वास्थ्य विभाग की नजरें नहीं ढूंढ पा रही हैं। यही कारण है कि कोरोना काल से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद ही छापेमारी की गई। जबकि साठगांठ के चलते इनमें से कुछ …

बरेली, अमृत विचार। जिले के शहरी व ग्रामीण इलाकों में चल रहे झोलाछाप व अपंजीकृत क्लीनिकों को स्वास्थ्य विभाग की नजरें नहीं ढूंढ पा रही हैं। यही कारण है कि कोरोना काल से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद ही छापेमारी की गई। जबकि साठगांठ के चलते इनमें से कुछ ही झोलाछापों पर कार्रवाई की जाती है। बाकी फिर धड़ल्ले से अपनी दुकान खोलकर लोगों की जान से खिलवाड़ करने लगते हैं।

शीशगढ़ में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद छापेमारी की गई थी। जबकि मैनपुरी में शिकायत के बाद महानिदेशक स्वास्थ्य की ओर से मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए थे।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार झोलाछाप पर आईएमसी अधिनियम की धारा 15 (2), (3) के तहत नोटिस देने का अधिकार है। वह तीन दिन में संबंधित से अभिलेख दिखाने को कह सकता है। अभिलेख नहीं दिखाने पर उसे प्रैक्टिस करने के लिए अयोग्य व अपंजीकृत मानते हुए कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही उस पर आईपीसी की धाराओं के तहत भी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। इतना ही नहीं उसकी गिरफ्तारी भी हो सकती है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की साठगांठ के चलते कार्रवाई नहीं की जाती है।

एंटीबॉयोटिक व स्टेरॉयड दे रहे झोलाछाप
गली-मुहल्लों में बैठे झोलाछाप लोगों की बीमारियां दूर नहीं कर रहे बल्कि उनको गंभीर रोग दे रहे हैं। अक्सर मरीज झोलाछाप के पास जाने के बाद कुछ समय के लिए राहत महसूस करता है लेकिन उसे बाद उसकी दिक्कत बढ़ जाती है। झोलाछाप मरीजों को धड़ल्ले से एंटीबॉयोटिक व स्टेरॉयड दे रहे हैं। इससे जल्द बीमारी दब जाती है लेकिन स्थायी इलाज नहीं हो पाता। तुरंत आराम मिलने के कारण लोग दोबारा भी झोलाछाप के पास जाते हैं।

केस एक

स्वास्थ्य मंत्री से मामले की जांच के बाद विभाग ने लिया संज्ञान
भोजीपुरा निवासी सतीश चंद्र ने स्वास्थ्य मंत्रालय में शिकायत पत्र देकर आरोप लगाया कि उनके गांव में एक झोलाछाप पिछले कई सालों से अपनी दुकान चला रहा है। इसकी शिकायत कई बार स्वास्थ्य विभाग में की गई लेकिन वह अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर बच जाता है। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी तक भी शिकायत पहुंचाई गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में छापा मारा लेकिन कार्रवाई अभी तक नहीं हुई।

केस दो

बीते दिनों स्थानीय लोगों की शिकायत पर सुभाष नगर, बदायूं रोड और तिलक कॉलोनी में नाथ क्लीनिक नाम से चल रही दुकान पर विभागीय अधिकारियों ने छापेमारी की। इनके क्लीनिक में बीएमएस, एमबीईएच और बीडीएस की डिग्री लिखी है। शिकायत के बाद एसीएमओ डा. अशोक कुमार ने मौके पर गोस्वामी के बेटे को क्लीनिक पर बैठा पाया। उससे डिग्री दिखाने को कहा गया लेकिन वह नहीं दिखा सके। इनका पंजीकरण भी सीएमओ कार्यालय में नहीं था। टीम ने क्लीनिक बंद कराने के साथ ही नोटिस जारी किया लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बीते कुछ सालों में झोलाछापों पर हुई कार्रवाई

  • जिले में चिह्नित झोलाछाप- 256
  • बंद किए गए अपंजीकृत क्लीनिक- 12
  • झोलाछापों पर एफआईआर- 73

सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में झोलाछाप को चिह्नित कर सूची बनाकर दो दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उनसे आशा और एएनएम का सहयोग भी लेने को कहा गया है। सभी झोलाछापों पर कार्रवाई होगी। -डा. बलवीर सिंह, सीएमओ

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