बुखार का कहर
उत्तर प्रदेश में बुखार का कहर बढ़ता जा रहा है। चार जिलों में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा फिरोजाबाद में 75 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें 65 बच्चे थे। बुखार से तपते बच्चे मां-बाप की गोद में ही दम तोड़ रहे हैं। डेंगू और वायरल …
उत्तर प्रदेश में बुखार का कहर बढ़ता जा रहा है। चार जिलों में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा फिरोजाबाद में 75 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें 65 बच्चे थे। बुखार से तपते बच्चे मां-बाप की गोद में ही दम तोड़ रहे हैं। डेंगू और वायरल के प्रकोप ने सुहागनगरी को अपनी चपेट में ले लिया है। हालात खराब होते जा रहे हैं। अस्पतालों में बेड फुल हैं। जांच के लिए लंबी लाइन लगी हुई हैं। प्रदेश सरकार ने जिले में नए डॉक्टरों को तैनात किया है। अन्य जिलों से भी डॉक्टरों को फिरोजाबाद में लगाया गया है ताकि जल्द से जल्द हालातों पर काबू पाया जा सके। प्रशासन ने लापरवाही में तीन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है।
मथुरा, मैनपुरी,फर्रुखाबाद के अलावा आगरा और बागपत में भी बुखार और डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं। मथुरा में 23 दिन में 12 की मौत हुई है। मैनपुरी में एक महीने में ही 20 लोगों की जान जा चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि बुखार से पीड़ित लोगों में डेंगू, मलेरिया के अलावा जापानी इंसेफ़ेलाइटिस जैसे लक्षण भी दिख रहे हैं। प्लेट्लेट्स गिर जाते हैं। इसके बाद मरीज की हालत को काबू में करना मुश्किल हो जाता है। बहुत ही जल्दी इस बीमारी में मौत हो रही है, खासकर बच्चों की। डॉक्टर भी परेशान हैं। वायरस को खत्म होने में कम से कम दो हफ्ते का समय लग रहा है।
राहत की बात है कि मृतकों में कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव नहीं है। बुखार से हो रही मौतों ने केंद्र सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। मौतों का कारण जानने के लिए एक टीम भेजने का फैसला लिया है। इस टीम में नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के सदस्य शामिल होंगे।
भले ही प्रशासन ने कुछ डॉक्टरों पर कार्रवाई करके खुद के हरकत में होने की दावेदारी की हो लेकिन इन हालातों के लिए नगर निगम, नगर पालिकाएं, नगर पंचायतें भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। इस क्षेत्र का पानी पीने योग्य नहीं माना जाता। साफ-सफाई को लेकर उदासीनता बरती गई। डेंगू पॉजिटिव आने के बाद भी मरीजों के घरों के आसपास कीटनाशक का छिड़काव नहीं कराया गया था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी लापरवाही बरती।
एक पखवाड़े तक वायरल बुखार बताया जाता रहा। डेंगू पॉजिटिव के मामले दबाए रखे। मेडिकल कॉलेज में एंटीजन टेस्ट की डेंगू पॉजिटिव रिपोर्ट को भी नकार दिया गया। सत्यापन के लिए एलाइजा टेस्ट किट तक नहीं मंगाई गई। इसके बाद हालात बिगड़ते चले गए और लोग असमय काल कलवित हो गए। सरकारी विभाग एक-दूसरे पर इस महामारी का ठीकरा फोड़ने में जुटे हैं।
