अल्मोड़ा: खुद तकनीकी स्टाफ होने के बाद दूसरों से कराए जा रहे निर्माण कार्य
अल्मोड़ा, अमृत विचार। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग पिछले चार साल से संदेह के घेरे में है। स्वास्थ्य महानिदेशालय के पास प्रत्येक जनपद में स्वास्थ्य विभाग के पास अपने अवर अभियंता, मंडल स्तर पर सहायक अभियंता व प्रदेश स्तर पर अधिशासी अभियंता व अन्य स्टाफ पर्याप्त है परंतु विभाग इनसे कोई काम नहीं लेता है तथा …
अल्मोड़ा, अमृत विचार। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग पिछले चार साल से संदेह के घेरे में है। स्वास्थ्य महानिदेशालय के पास प्रत्येक जनपद में स्वास्थ्य विभाग के पास अपने अवर अभियंता, मंडल स्तर पर सहायक अभियंता व प्रदेश स्तर पर अधिशासी अभियंता व अन्य स्टाफ पर्याप्त है परंतु विभाग इनसे कोई काम नहीं लेता है तथा इनके द्वारा कराए जा रहे कार्यों को अन्य कार्यदायी संस्थाओं को सौंपता है। राज्य स्थापना के बाद से उप्र सरकार से प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी स्टाफ मिला।
प्रदेश में वर्षों से स्वास्थ्य विभाग के पास तकनीकी स्टाफ है। जिसमें निर्माण के अभियंताओं के साथ ही विद्युत संबंधी कार्य के लिए अलग से स्टाफ है इसके अलावा जनपद स्तर पर अभियंता तैनात हैं। परंतु पिछले चार साल से विभाग द्वारा कई जनपदों में चिकित्सालयों, कार्यालयों व आवासों में किए जाने वाला कार्य अन्य एजेंसियों से किया जा रहा है जबकि अपने अभियंताओं व तकनीकी स्टाफ को इससे मुक्त रखा गया है। जिससे यह विंग
खाली पड़ी है। जनपद स्तर में विभिन्न योजनाओं मंे मिलने वाला पैसा प्रदेश या जनपद स्तर पर अन्य कार्यदायी संस्थाओं को दिया जा रहा है। जिससे विभागीय स्तर पर रोष पनप रहा है।
कंटीजेंसी आदि के नाम पर जाती है कई राशि
– सरकार द्वारा धनराशि स्वास्थ्य विभाग के पास जाती है इसके बाद इसे अन्य कार्यदायी संस्थाओं को दी जाती है जिसमें कई भाग कंटीजेंसी व अन्य खर्च के नाम पर विभाग काट लेता है जिससे यह राशि धरातल पर खर्च नहीं हो पाती
है।
समय पर नहीं होते कार्य
चार साल से देखने में आ रहा है कि बड़ी कार्यदायी संस्थाओं के पास पूर्व से ही कई कार्य होते हैं वह स्वास्थ्य विभाग के कार्यों को समय पर पूरा नहीं कर पा रही है जिसका उदाहरण प्रदेश में बन रहे वैलनेस सेंटर हैं।
चार साल से पंजीकरण प्रक्रिया लटकी
स्वास्थ्य विभाग में पूर्व में अन्य विभागों की तरह पंजीकरण व्यवस्था लागू थी परंतु भाजपा की सरकार आने के बाद से यह पंजीकरण व्यवस्था शासन व
महानिदेशालय पर लटकी है। जिससे यहां कार्य कर रहे दर्जनों ठेकेदार बेरोजगार हैं। ठेकेदारों ने बताया कि विभाग पंजीकरण के लिए चार साल से पोर्टल की बात कर रहा है जबकि अन्य कार्यदायी संस्थाओं में मैनुअल रूप से पंजीकरण प्रक्रिया जारी है।
धामी व रावत से जगी उम्मीद
– ठेकेदारों ने प्रदेश में पुष्कर धामी के मुख्यमंत्री बनने व डा. धन सिंह रावत के स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद ठेकेदारों में उम्मीद जगी है कि वे इस समस्या का निदान करेंगे। कहा कि सीएम व स्वास्थ्य मंत्री जिस तरह से वर्षों से लंबित मामलों को निपटा रहे हैं उसी तरह इस पर भी निर्णय लेंगे व प्रदेश के सैंकड़ों ठेकेदारों के रोजी रोटी के संकट को दूर करेंगे।
