बरेली: औषधीय पौधे लगाओ, 36 हजार का अनुदान पाओ

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बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल के बाद अचानक औषधीय पौधों की बढ़ी मांग पर उद्यान विभाग ने परंपरागत बागवानी के साथ ही बागों एवं औषधीय पौधों को रोपने पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके तहत औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग बागवानों को 36 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल के बाद अचानक औषधीय पौधों की बढ़ी मांग पर उद्यान विभाग ने परंपरागत बागवानी के साथ ही बागों एवं औषधीय पौधों को रोपने पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके तहत औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग बागवानों को 36 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान देगा।

जनपद की बात करें तो आम, लीची, अमरूद, आडू से लेकर अन्य फलों की बागवानी हो रही है। इस बार औद्यानिक मिशन के तहत पोषण के साथ आमदनी के लक्ष्य के साथ परंपरागत बागवानी के अलावा खेत और बागों की बाउंड्री पर औषधीय पौधे लगाने को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके तहत जनपद को लक्ष्य भी आवंटित हो गया है। खेत एवं बागों की बाउंड्री पर आंवला, करौंदा लगाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा आम, अमरूद, केला, पपीता लगाया जाएगा। बाउंड्री पर लगाने वाले पौधों से जहां बागों में जंगली जानवरों के घुसने से रोकने में मदद मिलेगी। वहीं इनके फलों को बेचकर आमदनी भी बढे़गी। वहीं योजना के तहत अनुदान पाने के लिए खेत या बाग की बाउंड्री पर औषधीय पौधे लगाने के मानक तय किए गए हैं।

ड्रेगन फ्रूट एवं स्ट्राबेरी पर भी अनुदान
जनपद में ड्रेगन फ्रूट और स्ट्राबेरी की बागवानी के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में ड्रेगन फ्रूट के करीब तीन हजार पौधे लगेंगे। इसके लिए बागवानों को प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। स्ट्राबेरी के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जनपद को ड्रेगन फ्रूट और स्ट्राबेरी के लिए पांच-पांच हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है।

औद्यानिक मिशन के तहत इस बार खेत या बागों की बाउंड्री पर औषधीय पौधे रोपने का लक्ष्य दिया गया है। इसके तहत किसानों को अनुदान दिया जाएगा। इससे किसान पौषण के साथ ही अपनी आमदनी भी बढ़ा सकेंगे। – पुनीत पाठक, जिला उद्यान अधिकारी

औद्यानिक मिशन के तहत लक्ष्य

  • पौधे- लक्ष्य
  • आम- दस हेक्टेयर
  • अमरूद- दस हेक्टेयर
  • केला – दस हेक्टेयर
  • पपीता- आठ हेक्टेयर
  • आंवला- छह हेक्टेयर
    नोट: उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार।

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