बरेली: जुर्माना भरो और बेचते रहो जहर, नहीं होगा लाइसेंस निरस्त
मोनिस खान, अमृत विचार, बरेली। गली मोहल्ले से लेकर नामी रेस्टोरेंट में बिकने वाली खाने-पीने की वस्तुएं कितनी सुरक्षित हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर दुकानदारों के पास खाद्य सामग्री बेचने का लाइसेंस तक नहीं हैं तो दूसरी तरफ लाइसेंस लेकर खाद्य वस्तुएं बेचने वाले दुकानदारों के सैंपल जांच …
मोनिस खान, अमृत विचार, बरेली। गली मोहल्ले से लेकर नामी रेस्टोरेंट में बिकने वाली खाने-पीने की वस्तुएं कितनी सुरक्षित हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर दुकानदारों के पास खाद्य सामग्री बेचने का लाइसेंस तक नहीं हैं तो दूसरी तरफ लाइसेंस लेकर खाद्य वस्तुएं बेचने वाले दुकानदारों के सैंपल जांच में फेल होने के बावजूद केवल जुर्माना डालकर छोड़ दिया जाता है। बीते दिनों 35 दुकानदारों पर करीब 10 लाख का जुर्माना लगाया गया था।
इन खाद्य पदार्थ विक्रेताओं के यहां दूध, मिठाई, बिस्कुट, बेसन, सरसों के तेल के सैंपल असुरक्षित मिले थे। हैरानी की बात यह है कि यह सभी सैंपल बीते साल लिए गए थे और इन प्रतिष्ठानों पर खाद्य पदार्थ बिकने का सिलसिला बदस्तूर जारी था जिसे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ ही कहा जाएगा। अब भी भारी संख्या में मामले लंबित हैं, विभाग द्वारा कमजोर पैरवी के चलते जहर के ये सौदागर बचे रहते हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा जिले में कुल 2466 खाद्य कारोबारियों को लाइसेंस जारी किए गए हैं मगर गली मोहल्ले में खाने-पीने का सामान बेचने और तैयार करने वालों का मकड़जाल फैला हुआ है। इनमें अधिकतर बगैर लाइसेंस के ही काम करते हैं। वहीं 13,231 दुकानदार ऐसे हैं जिनका पंजीकरण विभाग में है।
अधिकारियों का कहना है कि जिन कारोबारियों का सालाना कारोबार 12 लाख से अधिक है, उन्हें विभाग की ओर से लाइसेंस जारी किए जाते हैं। जबकि, इससे कम आय वाले कारोबारियों का पंजीकरण आवश्यक है। पंजीकृत या गैर पंजीकृत दुकानों पर सैंपल लेने की बात करें तो त्योहारों के नजदीक आते ही विभाग की नींद टूटती है। सैंपलिंग की खानापूर्ति कर उन्हें जांच के लिए भेज दिया जाता है। अगर विभागीय अधिकारी व्यापक रूप से जिले भर में अभियान चलाकर लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन संबंधी जांच करें तो हजारों की तादाद में अवैध कारोबारियों की पकड़ हो सकती है।
विभाग की ओर से त्योहारों से पहले जिन दुकानों से फूड आइटम के सैंपल लिए जाते हैं उनको जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है। करीब 15 दिन का समय जांच रिपोर्ट आने में लगता है। ऐसे में समय पर कार्रवाई भी नहीं हो पाती। कई बार चेकिंग अभियान के दौरान कुछ फूड आइटम के सैंपल अधोमानक पाए जाते हैं। इस दौरान संबंधित प्रोडक्ट को नष्ट तो कर दिया जाता है लेकिन संबंधित कारोबारी लंबी प्रक्रिया के चलते साठगांठ कर बच जाते हैं।
साठगांठ कर सालों तक लंबित रखते हैं मामला
मंगलवार देर रात खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने करीब 8 दुकानदारों के खाद्य पदार्थों के सैंपल अधोमानक और असुरक्षित मिलने पर वाद दायर किया था मगर 509 मामले एडीएम कोर्ट में लंबित पड़े हैं जिन पर कार्रवाई होना बाकी है मगर विभाग की कमजोर पैरवी के चलते ऐसे दुकानदार बचे रहते हैं जिनके सैंपलों में गड़बड़ी मिली है।
दुकानदारों से साठगांठ कर मामलों को सालों तक लंबित रखा जाता है। वहीं दो से अधिक बार खाद्य पदार्थों के सैंपल असुरक्षित मिलने पर लाइसेंस के निरस्तीकरण तक का प्रावधान है। हैरानी की बात यह है कि कई ऐसे मामले सामने आने के बाद भी विभाग लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करता।
करीब 509 मामले एडीएम कोर्ट में लंबित पड़े हैं, जो भी कार्रवाई होती है वह प्रक्रिया के तहत की जाती है। फिलहाल किसी खाद्य पदार्थ कारोबारी का लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया है। -धर्मराज मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी
लोगों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। अगर कोई बिना लाइसेंस या बिना पंजीकरण के खाद्य वस्तुएं बेच रहा है तो यह सरासर गलत है। लोगों को अपना लाइसेंस बनवाकर ही कारोबार शुरू करना चाहिए। -हरीशंकर कन्नौजिया, व्यापारी नेता
लाइसेंस और पंजीकरण की सुविधा जब विभाग ने दी है तो लोगों को उसी प्रक्रिया के तहत व्यापार शुरू करना चाहिए। इसके अलावा विभाग द्वारा भी प्रकिया के लिए व्यापारियों को परेशान किया जाता है जिसके चलते बहुत बार नियमों का पालन नहीं हो पाता। -रोहित जिंदल, व्यापारी नेता
यह बेहद गंभीर बात है कि अगर बिना लाइसेंस के लोग खाद्य सामग्रियों को कारोबार कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ विभाग को सख्त होना पड़ेगा। बिना सख्ती दिखाए लोगों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं रोका जा सकता। -शाजेब खान
हम बाहर जाकर खाना खाते हैं यह नहीं पता होता कि दुकान का लाइसेंस है या नहीं, सरकार ने एक प्रक्रिया तय की है मगर उसका पालन नहीं होने के कारण बिना मानकों के खाद्य वस्तुएं बिकती हैं। -आलोक सेठ
यह सीधा लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है, संबंधित विभाग को संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए, न सिर्फ लाइसेंस दिया जाए बल्कि समय-समय पर छोटे बड़े खाद्य पदार्थ बेचने वालों की निगरानी की जाती रहे। -रोहित राकेश
अक्सर बाहर जाकर खाना खाते हैं, त्योहारों पर मिठाई आदि खरीदते हैं लेकिन यह पता करना बेहद मुश्किल है कि जो खाद्य वस्तु हम खा रहे हैं वह सुरक्षित है या नहीं। इसके लिए तो संबंधित विभाग को नकेल कसने की जरूरत है। -शेखर राजयादा
