खतरनाक प्रदूषण
देश में बढ़ते वायु प्रदूषण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताई है। हवा में बढ़ता प्रदूषण हम सबको अपनी जद में ले रहा है। इसका असर इतना खतरनाक है कि यह लोगों की जिंदगी के दिनों को धीरे-धीरे कम कर रहा है। सेहत के साथ-साथ वायु प्रदूषण की मार अर्थव्यवस्था पर भी पड़ती है। …
देश में बढ़ते वायु प्रदूषण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताई है। हवा में बढ़ता प्रदूषण हम सबको अपनी जद में ले रहा है। इसका असर इतना खतरनाक है कि यह लोगों की जिंदगी के दिनों को धीरे-धीरे कम कर रहा है। सेहत के साथ-साथ वायु प्रदूषण की मार अर्थव्यवस्था पर भी पड़ती है। इसलिए वायु प्रदूषण के खतरों को अनदेखा करना घातक हो सकता है। एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स की रिपोर्ट कहती है कि प्रदूषण कम हुआ तो दुनियाभर में इंसान की औसत उम्र 2.2 साल बढ़ जाएगी।
भारत में औसत उम्र 5 साल 6 महीने बढ़ जाएगी यानी औसत उम्र 69 साल है तो ये बढ़कर 74 साल के पार पहुंच जाएगी। अमेरिका स्थित एक रिसर्च ग्रुप एनर्जी पॉलिसी इंस्टिट्यूट ऑफ यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो (एपिक) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली समेत मध्य, पूर्वी और उत्तरी भारत में रह रहे 48 करोड़ से ज्यादा लोगों को खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके वायु प्रदूषण की कीमत अपनी जिंदगी के कीमती साल कम करते हुए चुकानी पड़ सकती है।
चेतावनी देते कई अध्ययन हर साल प्रकाशित होते हैं, तब लगता है कि सरकारें इस दिशा में कुछ व्यावहारिक कदम उठाएंगी, मगर इन अध्ययनों के आंकड़े बाकी सूचनाओं की तरह कुछ दिन के लिए चर्चा में रहते हैं और फिर भुला दिए जाते हैं। जब सर्दी आने को होती है और कुहरे में मिल कर प्रदूषण अपना असर दिखाता है, तब सरकारों की ओर से कुछ कार्रवाई होती नजर आती है। हालांकि केंद्र सरकार ने दो वर्ष पहले स्वच्छ वायु योजना की शुरुआत की थी।
योजना का लक्ष्य देश के सबसे ज्यादा प्रभावित 102 शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर में 20 से 30 फीसदी तक कटौती करना था। देश में बढ़ते वायु प्रदूषण स्तर के सभी आंकड़ें जब सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की ओर इशारा करते हैं तो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु योजना स्वास्थ्य संकट से निपटने में विफल दिखती है। देश में हवा की गुणवत्ता की वास्तविक समय में निगरानी करने वाले यंत्र सिर्फ 101 जगह पर मौजूद हैं, जबकि विश्लेषण के मुताबिक कम से कम ऐसे 4000 यंत्र की जरूरत है।
वायु प्रदूषण का स्तर जिस तरह से बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए ऐसे कदमों को और तेज करने की तत्काल आवश्यकता है। अगर वास्तविक परिवर्तन लाना है तो इसके लिए और ज्यादा धन की आवश्यकता होगी, जिसे केन्द्र और राज्य सरकारों को आवंटित करना होगा। प्रदूषण के स्रोत उद्योग, परिवहन, कृषि, घरेलू से निपटने के लिए कार्रवाई करते हुए मिल-जुलकर आगे बढ़ना होगा।
