बुखार का जानलेवा वार
रहस्यमयी बुखार का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। फिरोज़ाबाद से शुरू हुआ बुखार बिहार और मध्य प्रदेश तक में कहर ढाने लगा है। बिहार में बुखार के चलते अस्पताल फुल हो गए हैं। एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज हो रहा है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बुखार का प्रकोप बढ़ रहा …
रहस्यमयी बुखार का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। फिरोज़ाबाद से शुरू हुआ बुखार बिहार और मध्य प्रदेश तक में कहर ढाने लगा है। बिहार में बुखार के चलते अस्पताल फुल हो गए हैं। एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज हो रहा है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है। कासगंज, एटा, मथुरा, फिरोज़ाबाद, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी और फर्रुखाबाद के बाद पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली, सीतापुर व अन्य जिलों में भी वायरल जैसे लक्षणों वाले इस रहस्यमयी बुखार से पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है।
पीलीभीत में पिछले दिनों दो बच्चों की मौत हो गई। शाहजहांपुर के सरकारी अस्पतालों में नए मरीज भर्ती करने को जगह नहीं है। इस रहस्यमयी बुखार का कोई तोड़ नहीं निकल पा रहा है। कोई इसे वायरल फीवर बताता है, तो कहीं डेंगू कहा जाता है। कुछ डॉक्टर इस रहस्यमयी बुखार को ‘इंफ्लुएंजा’ वायरस मान रहे हैं तो कुछ डेंगू और कुछ अन्य डॉक्टर इसे इंफ्लुएंजा वायरस के स्वरूप में बदलाव की आशंका के तौर पर भी देख रहे हैं लेकिन अभी तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचा नहीं जा सका है। दरअसल इस बुखार में कई बीमारियों के लक्षण नजर आ रहे हैं। तेज बुखार के साथ तेजी से प्लेटलेट्स गिरने, नजला-खांसी, जोड़ों में दर्द, डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं और सबसे ज्यादा मौतें बच्चों की हो रही हैं।
बच्चों की मौतों से इस कदर खौफ व्याप्त है कि लोग भय के कारण गांव छोड़कर जा रहे हैं। मथुरा के फरह के कौंह गांव में फैली महामारी के कारण कई परिवार घरों में ताला लगाकर रिश्तेदारों के घर पर चले गए हैं। स्थिति इतनी खराब है कि अधिकांश जगहों पर अस्पतालों में जांच के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। अभी तक डेंगू के वायरस के कुल चार वैरिएंट (डेन 1, 2, 3, 4) सामने आए हैं लेकिन पेट में दर्द के साथ बुखार आने के दो-तीन दिनों के भीतर ही बच्चों की मौत होने से स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता सता रही है कि कहीं डेंगू का नया वैरिएंट डेन 5 तो नहीं फैल रहा है।
बहरहाल, विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक नमूनों की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। जांच के बाद ही कहा जा सकेगा कि बुखार से बच्चों की इतनी बड़ी संख्या में मौत का वास्तविक कारण क्या है। इस मौसम में मच्छरों से पनपने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए की जाने वाली फॉगिंग या साफ-सफाई के मामले में संबंधित विभागों द्वारा लापरवाही न की जाए। इस बात के भी पुख्ता प्रबंध किए जाएं कि अस्पतालों में ऐसे लोगों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
