टीके का निर्यात

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Edited By Amrit Vichar
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वैश्विक महामारी कोरोना से मुकाबले के लिए भारत ने फिर से अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। ‘वैक्सीन मैत्री’ कार्यक्रम के तहत भारत कोविड-19 रोधी अतिरिक्त टीकों का निर्यात करेगा। बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 रोधी टीकों का निर्यात करने के भारत के फैसले की प्रशंसा की है और वर्ष के अंत तक सभी …

वैश्विक महामारी कोरोना से मुकाबले के लिए भारत ने फिर से अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। ‘वैक्सीन मैत्री’ कार्यक्रम के तहत भारत कोविड-19 रोधी अतिरिक्त टीकों का निर्यात करेगा। बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 रोधी टीकों का निर्यात करने के भारत के फैसले की प्रशंसा की है और वर्ष के अंत तक सभी देशों में 40 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में इसे ‘महत्वपूर्ण घटनाक्रम’ बताया है।

साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो ने कोविड के टीकाकरण को लेकर अंतराष्ट्रीय पहल के लिए वैक्सीन की आपूर्ति फिर शुरू करने के भारत के निर्णय का स्वागत किया है। भारत ने इस साल अप्रैल में देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप के कारण टीकों का निर्यात बंद कर दिया था। अब केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि देश केवल अतिरिक्त टीकों का निर्यात करेगा। विडंबना ही है कि दुनिया की महाशक्तियों व विकसित देशों को जैसी प्रतिबद्धता कोरोना के खिलाफ लड़ाई में दिखानी चाहिए थी, वैसी देखने को नहीं मिली।

वहीं टीकाकरण के मुद्दे पर संकीर्ण राजनीति भी की जाती रही है। इसमें दो राय नहीं कि भारत की इस प्रतिबद्धता से जहां दुनिया में कोविड संक्रमण से लड़ाई आसान होगी, वहीं भारत के इस योगदान को विश्व भी स्वीकार करेगा। टीके के मुद्दे पर ब्रिटेन संकीर्ण राजनीति करता रहा है। ब्रिटेन की सरकार भारत में कोविशील्ड का टीके लगे लोगों को टीका लगा नहीं मानती।

विडंबना है कि कोविशील्ड को ब्रिटेन में ही तैयार किया गया है और इसका उत्पादन भारत में सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा किया गया है। जबकि ब्रिटेन में बने इसी टीके को ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका के नाम से लगाया जा रहा है और उसे मान्यता दी जा रही है। समझ से परे है कि एक टीके के दो नामों से यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है। ब्रिटेन के दोहरे मापदंडों का प्रतिकार करते हुए मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन को चेताया था कि यदि उसने कोविशील्ड वैक्सीन को मान्यता देने में भेदभाव किया तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। परिणाम स्वरूप भारत के दबाव के आगे झुकते हुए ब्रिटेन ने भारतीय वैक्सीन को भी मान्यता देते हुए अपनी ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव किया है, जिसके बाद कोविशील्ड लगवाने वालों को भी देश में प्रवेश मिल सकेगा।

हालांकि इसमें भी एक पेच है। भारतीयों को कोविशील्ड का दोनों टीका लगा होने के बावजूद ब्रिटेन क्वारंटीन में रहने की जरूरत होगी। सरकार को इसका भी विरोध करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी विकसित देशों के टीकाकरण को लेकर बरते जा रहे भेदभाव पर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।