दु:खद: नहीं रहे कुमाऊं के वरिष्ठ जनकवि तारा राम, शोक की लहर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के प्रसिद्ध जनकवि ताराराम कवि का 98 वर्ष की उम्र में देहावसान हो गया। वह जीवन पर्यंत लोक संस्कृति की सेवा में समर्पित रहे। उनके निधन पर लोक कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों में शोक की लहर है। कवि तारा राम पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। बुधवार अपराह्न सुशीला …

हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के प्रसिद्ध जनकवि ताराराम कवि का 98 वर्ष की उम्र में देहावसान हो गया। वह जीवन पर्यंत लोक संस्कृति की सेवा में समर्पित रहे। उनके निधन पर लोक कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों में शोक की लहर है। कवि तारा राम पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। बुधवार अपराह्न सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। वह ओखलकांडा सुरंग के मूल निवासी और वर्तमान में नवाबी रोड हल्द्वानी में रह रहे थे।

जनकवि तारा राम (फाइल फोटो)

कुमाऊंनी लोक कलाकार तारा राम को मंचों पर काव्यपाठ और कुमाऊंनी गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 7 जुलाई 1925 को ओखलकांडा के गांव सुरंग में हुआ। बचपन से ही लोक संगीत में रूचि के कारण कवि तारा राम दूसरी कक्षा से आगे नहीं पढ़ पाए। लेकिन पहाड़ की विषम परिस्थितियों को अपनी लेखनी के माध्यम से गीतों की लय में पीरोने में कवि तारा राम का कोई सानी नहीं था।


वरिष्ठ साहित्यकार और कुमगढ़ पत्रिका के संपादक दामोदर जोशी देवांशु बताते हैं कि कवि तारा राम के भीतर पहाड़ का दर्द बसता था। उनकी रचनाओं में पहाड़ की संस्कृति, रहन सहन, नदी, झरने, खेत, फसल और जीवन का उल्लास भरा रहता था।

वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश जोशी बताते हैं कि मंच पर जब कवि ताराराम प्रस्तुति दे रहे होते थे तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनकी भाव भंगिमा देखने लायक होती थी। उनका जाना साहित्य जगत की बहुत बड़ी क्षति है, जिसे भरपाना नामुमकिन है। वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षक बीना भट्ट बड़शिलिया बताती हैं कि पहाड़ के जीवन को जानना हो तो कवि तारा राम की रचनाओं से आसानी से जाना जा सकता है। उन्होंने जीवनपर्यंत लोक संस्कृति को संवारने में लगा दिया। टीम घुघुती जागर के युवा कवि राजेंद्र ढैला ने बताया कि उत्थान मंच हीरानगर में घुघुतिया त्यार हो या भीमताल का हरेला मेला, हर जगह कवि तारा राम की प्रस्तुतियों ने समा बांधा। कवि ताराराम का इस नश्वर दुनिया से जाना बेहद दुखद और कुमाऊं के साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है।

जनकवि ताराराम के निधन पर वरिष्ठ कवि, साहित्यकार शंकर दत्त जोशी पनुवा, विनोद पंत खंतोली, डॉ. प्रदीप उपाध्याय, नवीन जोशी, गौरी शंकर वशिष्ठ, सुंदर लाल मदन, डॉ. जगदीश पंत, डॉ. मनोहर जोशी , देवकी नंदन भट्ट, मयंक, तारा पाठक, नितीश जोशी, भावना जोशी आदि ने शोक जताया है।

इधर, पहाड़ के हास्य कवि तारा राम के निधन पर देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल ने गहरा शोक प्रकट किया है। बृहस्पतिवार को गुरु नानक मार्केट में तारा कवि के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया गया। और दो  मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

संस्थापक अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर ने कहा कि 98 साल के तारा कवि पर अभी भी वही जोश था जो 20 साल के नौजवान पर होता है, उनकी कविताएं समाज को नई दिशा देने वाली होती थी। वह हमेशा नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ युवाओं को जगाते थे। तारा राम कवि हमेशा कई वर्षों से 26 जनवरी व 15 अगस्त के कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित रहते थे। उनकी कविता व जोशीले भाषण से लोगों में नया संचार पैदा होता था, ताराराम कवि के निधन से पहाड़ की संस्कृति को अपार क्षति पहुंची है।

इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिल खंडेलवाल, अनुशासन समिति के चेयरमैन डॉ. बालम सिंह बिष्ट, प्रदेश महामंत्री राजकुमार केसरवानी, जगमोहन सिंह चिलवाल, महानगर अध्यक्ष घनश्याम वर्मा, महामंत्री अजय कृष्ण गोयल, प्रदेश उपाध्यक्ष आफताब हुसैन, जगजीत सिंह चड्डा, रवि गुप्ता, रमेश जोशी, हर्ष जलाल, राकेश बेलवाल, विनोद दानी आदि रहे।

संबंधित समाचार